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और इस तरह मेरी मॉम ने मुझे मोटिवेट किया...

पांच स्टूडेंट्स हमसे शेयर कर रहे हैं कि किस तरह उनकी मांओं ने उन्हें जीवन के मुश्किल समय में मोटिवेट किया

1. बुलीइड आउट
मेरे बैचमेट्स मुझे स्कूल में बुली करते थे। वो एक गैंग बनाकर मुझे दबोच लेते और मुझे पीटते थे। इसके लिए रेसेस उनका पसंदीदा समय होता था। जब मैं दूसरों से अपनी स्टोरीज़ शेयर करता था तो यह देखकर मुझे आश्चर्य होता था कि वो मेरा विश्वास नहीं करते थे। मेरे डैड भी इसे ज़्यादा अटेंशन नहीं देते थे। लेकिन एक बार मेरी मॉम रेसेस में स्कूल आईं और उन्होंने देखा कि मेरे बैचमेट्स मुझे तंग कर रहे हैं। उन्होंने फ़ौरन प्रिंसिपल को इसकी शिक़ायत की और मुझे दूसरे स्कूल में शिफ़्ट करवा दिया। -रॉबिन मेसी

2. क़ामयाबी का प्रेशर
सभी के जीवन में ऐसे लमहे आते हैं, जब उनका भरोसा डगमगा जाता है। नाकामी के विचारों से आप बेचैन हो सकते हैं। लेकिन मेरी मॉम ऐसे में हमेशा मुझसे कहती थीं कि मैं और बेहतर कर सकता हूं। ऐसा भी हुआ है, जब मेरे क़रीबी दोस्त ही मेरे ख़िलाफ़ हो गए थे। वो मुझ पर कमेंट्स करके मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करते थे। तब मेरी मॉम ने ही मुझे याद दिलाया कि मुझे हमेशा अपने में भरोसा रखना चाहिए। -अज्ञात

3. फ़िट नहीं हो पाना
मुझे स्कूल में मेरे क़रीबी दोस्तों ने बुली किया था। वो मेरे नेचर का फ़ायदा उठाकर मेरा अपमान करते थे। इससे ना केवल मैं ख़ुद को अकेला महसूस करने लगा, बल्कि मेरा आत्मविश्वास भी कमज़ोर हो गया। मैंने अपनी मां को यह बताया तो वो मेरी दोस्त बन गईं। आख़िरकार वो मुझे इस हालत से बाहर निकलने में क़ामयाब हो ही गईं। -अनुष्का जैन

4. एग्ज़ाम स्ट्रेस से बाहर आना
जब भी कोई प्रोजेक्ट होता, मैं चीज़ों को को-ऑर्डिनेट नहीं कर पाता और एक अच्छा लीडर नहीं बन पाता। तब मुझको लगता कि मैं स्ट्रेस्ड-आउट हो गया हूं और मुझमें ज़्यादा कुछ करने की क्षमता नहीं है। ऐसे में मेरी मॉम ने मुझसे हमेशा यही कहा कि मुझसे इससे कहीं ज़्यादा करने की क्षमताएं हैं और जिस तरह से मैं कोशिश कर रहा हूं, उससे साबित होता है कि मैं एक विनर हूं। मेरी मॉम के मोटिवेशन ने मुझे एक बेहतर व्यक्ति बनाया। उन्होंने मुझे अपने में उन क्षमताओं को दिखाया, जो मैं ख़ुद नहीं देख पाता था। -मिमिक्षा रॉय

5. निगेटिविटी को दूर भगाना
कॅरियर ऑप्शंस चुनने से लेकर रोज़मर्रा के जीवन के फ़ैसलों तक, मेरी मॉम ने हमेशा मेरा सपोर्ट किया। उनकी फ़ेवरेट लाइन है- “इतना मायूस होने की क्या ज़रूरत है?” -तीस्ता रावल

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एक स्टारगेज़र का पत्र

एक टीन ने मिडिल स्कूल में बुलीइंग से बाहर आने के अपने अनुभवों को इस ख़त में बांटा है…
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer


डियर टीनएजर, 

हम शुरू करें, उससे पहले मैं आपको अपना परिचय देना चाहता हूं। मैं एक स्टारगेज़र हूं। मैं सिर्फ 15 साल का हूं। मुझ पर भरोसा करिए, मैं वास्तविक व्यक्ति हूं। मगर मेरे साथ ऐसा बहुत कुछ हुआ है, जिसने मुझे ख़ुद पर गर्व करना सिखा दिया है। आइए जानते हैं…

कंफर्टेबल रहें, खाने के लिए कुछ स्नैक्स लेकर आराम से बैठिए, क्योंकि मैं आपको अपनी ज़िंदगी की कहानी सुनाने वाला हूं।   

हम सभी को मिडिल स्कूल और हाई स्कूल में कई तरह के बुरे अनुभव मिलते हैं। मैंने भी वो अंधेरे दिन देखे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि हो सकता है मैं आपका भविष्य हूं और हम जिसके बारे में बात कर रहे हैं, वो मेरा बीता हुआ कल है। (इसमें कुछ भी नाटकीय नहीं है, यह सब सच है)।

मिडिल स्कूल मेरे लिए एक बुरा सपना : जब मैं मिडिल स्कूल में पढ़ रहा था, वह दौर मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह का हो गया था। मेरे बाल सफेद थे और हर बच्चा स्कूल में मेरा मजाक उड़ाने लगा था। यहां तक कि मेरे जूनियर यदि मेरी मदद करते थे, तो वे भी मेरा मजाक उड़ाते थे। हाइपरएक्टिविटी ने हालात को बदतर बना दिया था। 

मैंने आज तक इस बारे में किसी से कुछ नहीं कहा, इसलिए यहां मैं पहली बार अपना सीक्रेट बता रहा हूं, अब आप मुझ पर भरोसा कर सकते हैं। मुझे यह ज्ञान कहीं से नहीं मिला है। मैं अचानक से ही उछलना, हंसना, चीखना शुरू कर देता हूं। मेरी इन सब हाइपरएक्टिविटी को देखकर मेरा मजाक उड़ाया गया। मेरे स्कूल में कुछ बच्चों ने अफवाह फैलाई कि मैं गे हूं। जबकि ऐसा नहीं है। न ही मैं एलजीबीटीक्यू लोगों के विरोध में हूं, इसके उलट मैं उनका सपोर्ट करता हूं। दुखद सच यह है कि इस तरह के मूर्ख लगातार स्थिति को खराब करने में लगे हुए होते हैं। 

अब मुझे ऐसे लोगों को देखकर हंसी आती है। भले ही मजाक उड़ाने का सिलसिला कभी खत्म न हो, लेकिन मैं इसका आदी हो गया हूं। अब मुझे ये चीजें परेशान नहीं करती है, मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं भी उनके जैसा बन गया हूं।

अच्छे इंसान बनो : जिंदगी में हर व्यक्ति के पास ऐसी स्थिति में विकल्प होते हैं। मेरे पास भी थे कि मैं इन लोगों की तरह बन जाऊं और इनकी तरह ही दूसरों का मजाक बनाने लगूं या फिर एक अच्छा इंसान बनने का विकल्प मेरे सामने था। मैंने अच्छा इंसान बनने का विकल्प चुना। अच्छा इंसान बनने के लिए साहस होना चाहिए और यह आपकी इच्छाशक्ति की परीक्षा भी है। यह दिखाता है कि इनके मजाक बनाने का भी आप पर कोई असर नहीं हुआ। अच्छाई की सराहना करें। इसलिए ख़ुद से प्यार कीजिए।   

अगर आपको लगता है कि दुनिया को आपमें अच्छाई नहीं दिखती है, तो जाने दीजिए, क्योंकि कोई न कोई तो एक दिन आपकी अच्छाई को परखेगा ही। आप स्कूल में होने वाले इस तरह के गलत व्यवहार के खिलाफ लड़ने के लिए बहादुर, स्मार्ट और दिमागी तौर पर मजबूत हैं। मुझे पता है कि मिडिल स्कूल आपको जो देता है, उसके बदले क्या कीमत देनी होती है? आप इससे प्रभावित नहीं हो सकते। अपनी अच्छाई पर विश्वास रखो, मेरा विश्वास करो, यह कारगर है। भले ही अभी मेरा मजाक बनाया जा रहा है, इसके बावजूद मेरे स्कूल में कुछ लोग मुझे प्यार करते हैं और मेरा सम्मान करते हैं।

समय बदलता है, परिदृश्य बदलते हैं। जिंदगी नए मोड़ लेती है। सरप्राइज है क्योंकि, अब आप हाईस्कूल में हैं। सावधान रहिए : खतरा है, लेकिन आगे बढ़िए, छोड़िए मत, चीजें सुंदर हो जाती हैं। मेरा विश्वास कीजिए, अपनी आंखें बंद करिए और आगे बढ़िए। जो बीत गया, उसे जाने देना सीखें। इससे अफसोस के सिवाय हमें कुछ नहीं मिलता है। आपके पास जो भी आने वाले साल हैं, उन्हें बर्बाद नहीं कीजिए।

आप एक नए व्यक्ति हैं। गैलेक्सी के एक नए स्टार। और मैं आपको चमकते हुए देख रहा हूं। खुद से प्यार करो। आपको सब कुछ बहुत पसंद आएगा। 
आपका अपना 
स्टारगेज़र।

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