लॉग इन करें
This site is not collecting any personalized information for ad serving or for personalization. We do not share any information/cookie data about the user with any third party.OK  NO

एक स्टारगेज़र का पत्र

एक टीन ने मिडिल स्कूल में बुलीइंग से बाहर आने के अपने अनुभवों को इस ख़त में बांटा है…


डियर टीनएजर, 

हम शुरू करें, उससे पहले मैं आपको अपना परिचय देना चाहता हूं। मैं एक स्टारगेज़र हूं। मैं सिर्फ 15 साल का हूं। मुझ पर भरोसा करिए, मैं वास्तविक व्यक्ति हूं। मगर मेरे साथ ऐसा बहुत कुछ हुआ है, जिसने मुझे ख़ुद पर गर्व करना सिखा दिया है। आइए जानते हैं…

कंफर्टेबल रहें, खाने के लिए कुछ स्नैक्स लेकर आराम से बैठिए, क्योंकि मैं आपको अपनी ज़िंदगी की कहानी सुनाने वाला हूं।   

हम सभी को मिडिल स्कूल और हाई स्कूल में कई तरह के बुरे अनुभव मिलते हैं। मैंने भी वो अंधेरे दिन देखे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि हो सकता है मैं आपका भविष्य हूं और हम जिसके बारे में बात कर रहे हैं, वो मेरा बीता हुआ कल है। (इसमें कुछ भी नाटकीय नहीं है, यह सब सच है)।

मिडिल स्कूल मेरे लिए एक बुरा सपना : जब मैं मिडिल स्कूल में पढ़ रहा था, वह दौर मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह का हो गया था। मेरे बाल सफेद थे और हर बच्चा स्कूल में मेरा मजाक उड़ाने लगा था। यहां तक कि मेरे जूनियर यदि मेरी मदद करते थे, तो वे भी मेरा मजाक उड़ाते थे। हाइपरएक्टिविटी ने हालात को बदतर बना दिया था। 

मैंने आज तक इस बारे में किसी से कुछ नहीं कहा, इसलिए यहां मैं पहली बार अपना सीक्रेट बता रहा हूं, अब आप मुझ पर भरोसा कर सकते हैं। मुझे यह ज्ञान कहीं से नहीं मिला है। मैं अचानक से ही उछलना, हंसना, चीखना शुरू कर देता हूं। मेरी इन सब हाइपरएक्टिविटी को देखकर मेरा मजाक उड़ाया गया। मेरे स्कूल में कुछ बच्चों ने अफवाह फैलाई कि मैं गे हूं। जबकि ऐसा नहीं है। न ही मैं एलजीबीटीक्यू लोगों के विरोध में हूं, इसके उलट मैं उनका सपोर्ट करता हूं। दुखद सच यह है कि इस तरह के मूर्ख लगातार स्थिति को खराब करने में लगे हुए होते हैं। 

अब मुझे ऐसे लोगों को देखकर हंसी आती है। भले ही मजाक उड़ाने का सिलसिला कभी खत्म न हो, लेकिन मैं इसका आदी हो गया हूं। अब मुझे ये चीजें परेशान नहीं करती है, मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं भी उनके जैसा बन गया हूं।

अच्छे इंसान बनो : जिंदगी में हर व्यक्ति के पास ऐसी स्थिति में विकल्प होते हैं। मेरे पास भी थे कि मैं इन लोगों की तरह बन जाऊं और इनकी तरह ही दूसरों का मजाक बनाने लगूं या फिर एक अच्छा इंसान बनने का विकल्प मेरे सामने था। मैंने अच्छा इंसान बनने का विकल्प चुना। अच्छा इंसान बनने के लिए साहस होना चाहिए और यह आपकी इच्छाशक्ति की परीक्षा भी है। यह दिखाता है कि इनके मजाक बनाने का भी आप पर कोई असर नहीं हुआ। अच्छाई की सराहना करें। इसलिए ख़ुद से प्यार कीजिए।   

अगर आपको लगता है कि दुनिया को आपमें अच्छाई नहीं दिखती है, तो जाने दीजिए, क्योंकि कोई न कोई तो एक दिन आपकी अच्छाई को परखेगा ही। आप स्कूल में होने वाले इस तरह के गलत व्यवहार के खिलाफ लड़ने के लिए बहादुर, स्मार्ट और दिमागी तौर पर मजबूत हैं। मुझे पता है कि मिडिल स्कूल आपको जो देता है, उसके बदले क्या कीमत देनी होती है? आप इससे प्रभावित नहीं हो सकते। अपनी अच्छाई पर विश्वास रखो, मेरा विश्वास करो, यह कारगर है। भले ही अभी मेरा मजाक बनाया जा रहा है, इसके बावजूद मेरे स्कूल में कुछ लोग मुझे प्यार करते हैं और मेरा सम्मान करते हैं।

समय बदलता है, परिदृश्य बदलते हैं। जिंदगी नए मोड़ लेती है। सरप्राइज है क्योंकि, अब आप हाईस्कूल में हैं। सावधान रहिए : खतरा है, लेकिन आगे बढ़िए, छोड़िए मत, चीजें सुंदर हो जाती हैं। मेरा विश्वास कीजिए, अपनी आंखें बंद करिए और आगे बढ़िए। जो बीत गया, उसे जाने देना सीखें। इससे अफसोस के सिवाय हमें कुछ नहीं मिलता है। आपके पास जो भी आने वाले साल हैं, उन्हें बर्बाद नहीं कीजिए।

आप एक नए व्यक्ति हैं। गैलेक्सी के एक नए स्टार। और मैं आपको चमकते हुए देख रहा हूं। खुद से प्यार करो। आपको सब कुछ बहुत पसंद आएगा। 
आपका अपना 
स्टारगेज़र।

यदि आपके पास भी साझा करने के लिए कोई प्रेरक कहानी है, तो उसे edit@teentalkindia.com पर भेजें।

यदि आपके पास भी हमसे शेयर करने के लिए कोई कहानी है तो हमें यहां , ईमेल करें

यदि आपके पास कोई सवाल हैं, तो हमें यहां , ईमेल करें

आप क्लिक करके काउंसलर से भी बात कर सकते हैं टीनटॉक एक्सपर्ट चैट.

Comments

अगली कहानी


स्कूल की टॉपर टीनएजर का एक सप्ताह

आप सोचते होंगे कि जिन स्टूडेंट्स को बहुत बढ़िया ग्रेड्स मिलते हैं, उनकी ज़िंदगी भी बहुत बढ़िया होती होगी। पढ़िए राधिका की कहानी, जो सबसे अच्छे के पीछे के सबसे बुरे चेहरे को दिखा रही है...
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

मेरा नाम राधिका है। 

मैंने अपने सभी दोस्तों के लिए एक टॉपर के संघर्ष के बारे में आर्टिकल लिखने का फैसला किया। मैं ऐसे कई लोगों को जानती हूं, जो इस तरह के कठिन दौर से गुजरे हैं और इससे गुजर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरी कहानी उन्हें साहस जुटाने और ज़िंदगी में आगे बढ़ने में मदद करती है।

मेरी ज़िंदगी के सप्ताह की प्रस्तुति 

सोमवार
दस दिनों के ब्रेक के बाद, हमें आखिरकार अपना रिजल्ट मिल गया। 50 में से, मैंने सोशल स्टडीज में 50, हिंदी में 49, अंग्रेजी में 48.5, मैथ्स में 47 और साइंस में 46.5 अंक पाए। मैंने सोशल स्टडीज, हिंदी और अंग्रेजी सहित तीन विषयों में टॉप किया। मैं अपने पैरेंट्स को रिजल्ट बताने के लिए खुश थी। मैं गर्व से भरी हुई थी, लेकिन मेरे फ्रेंड्स नहीं थे। मेरी एक फ्रेंड ने कहा, “तो क्या  हुआ! आपके लिए हाई स्कोर करना कोई नई बात नहीं है।”
मुझे लगा, वो जल रही थी।
वह मेरे पेपर को रीचेक भी करवाना चाहती थी, ताकि वह टॉप स्कोरर बन सके।

मंगलवार
हर कोई अभी भी मुझे चिढ़ा रहा था, यह कहकर कि मैंने ज्यादा स्कोर करने के लिए किताबों को खंगाल दिया। मेरे फ्रेंड ने कहा, “बहुत टॉप कर रही है न इंग्लिश में, चल इस शब्द का अर्थ बता।” 
उसकी बातों से साफ था कि उसे बहुत ज्यादा जलन हो रही है, मगर मैंने उसे जाने दिया।  

बुधवार
मेरे एक फ्रेंड ने मुझे एक पार्टी में इन्वाइट किया और मुझसे कहा कि मुझे डांस करना होगा। सभी ने कहा, क्या!! राधिका का डांस!!
मेरे दोस्त ने मुझे एक पार्टी के लिए आमंत्रित किया और मुझसे कहा कि मुझे डांस करना होगा। 
तब किसी ने कहा, "अच्छा मजाक है! वह कभी डांस नहीं कर सकती। वह बहुत पढ़ाकू है और उसके जीवन में पढ़ाई के सिवा कुछ नहीं।”
यह बहुत अपमानजनक था, और मुझे बहुत तकलीफ हुई। गुस्सा भी आया लेकिन मैंने खुद को शांत किया। मैंने खुद से कहा, "यह समय भी गुज़र जाएगा।"

गुरुवार
रिजल्ट आने के बाद से ही मेरे दोस्तों ने मज़ाक़ उड़ाने के सिवा कुछ नहीं किया। जब भी मैं उनसे बात करने की कोशिश करती हूं, तो मैं उनके रूड कमेंट और टॉन्ट सुनती हूं। 
मैं उनके व्यवहार से तंग आ गई हूं। मैंने आज भी अपने दोस्तों से बात नहीं की क्योंकि मुझे पता था कि वे आखिरकार मेरा मज़ाक उड़ाएंगे। मैंने पढ़ाई पर ही फोकस किया। मैंने खुद को सांत्वना देने की कोशिश की लेकिन नहीं कर सकी। 

शुक्रवार 
आज, हर कोई मुझसे मेरे रूटीन और डेली शेड्यूल के बारे में पूछने लगा। 
“तुम रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करती हो?”
“तुम कितने ब्रेक लेती हो?”
“तुम कितनी बार रिवाइज करती हो?”
मैं तब आकर्षण का केंद्र बन गई थी। तभी एक लड़के ने कमेंट पास किया,  “तुम उससे ऐसा क्यों पूछ रहे हो, अगर हम उसका शेड्यूल फॉलो करना शुरू करेंगे, तो हम न ही खेल सकेंगे या मैसेज कर सकेंगे।”
मैं इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी और मैंने कड़क आवाज में जवाब दिया, “मेरे से इस बारे में सिर्फ तभी बात करें, जब आप हाई स्कोर करने में योग्य हों। आप ठीक से इंग्लिश भी नहीं बोल सकते हैं, इसलिए चुप हो जाएं।"

शनिवार 
मैंने इस घटना के बारे में अपनी मां से बात की। उन्होंने मुझे दो बातें बताईं। एक यह थी कि, मेरे फ्रेंड्स मुझे नीचा दिखाने करने की कोशिश कर रहे थे, ताकि मेरा परफॉर्मेंस बिगड़ जाए। दूसरा यह था कि यदि उनका यही व्यवहार बना रहता है, तो मुझे अपने टीचर से बात करनी चाहिए।
मैंने इन उदाहरणों को अपने टीचर के साथ साझा किया और उन्होंने मुझे बताया कि मैं गलत नहीं थी और मुझे उनके कमेंट को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि, मुझे बोलना चाहिए।  

रविवार 
बहुत समय बाद मैं अपने मन को शांत कर पाई। मैं शांति से बैठ सकती हूं और अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर सकती हूं। मुझे ख़ुद पर गर्व हो रहा है। अब, लोगों के कमेंट्स मुझे ज़्यादा प्रभावित नहीं करते हैं। अब, मैं उन्हें इग्नोर करके अपनी ज़िंदगी के साथ आगे बढ़ती हूं। 
मैं अपना कॅरियर बनाना चाहती हूं और अच्छे नंबर लाना उसकी पहली ज़रूरत है। मैं अपनी कामयाबी के रास्ते में लोगों के कमेंट्स को नहीं आने दूंगी।

अगर आपके पास भी ऐसी ही कोई इंस्पायरिंग स्टोरी है, तो उसे edit@teentalkindia.com. पर भेजिए। अगर आपके पास कोई सवाल है, तो expert@teentalkindia.com. पर लिखें। आप Gtalk पर काउंसलर से सोमवार से शुक्रवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच चैट भी कर सकते हैं।

यदि आपके पास भी हमसे शेयर करने के लिए कोई कहानी है तो हमें यहां , ईमेल करें

यदि आपके पास कोई सवाल हैं, तो हमें यहां , ईमेल करें.

आप क्लिक करके काउंसलर से भी बात कर सकते हैं टीनटॉक एक्सपर्ट चैट.

टिप्पणियाँ

कॉपीराइट टीनटॉक 2018-2019
डिस्क्लेमर : टीनटॉकइंडिया आपातकालीन सेवाएं नहीं प्रदान करता है और न ही यह किसी तरह की आपदा में हस्तक्षेप करने वाला कोई केंद्र है। अगर आप या आपका कोई मित्र या परिचित गहरे अवसाद के दौर से गुज़र रहा है, या उसके मन में आत्महत्या या स्वयं को नुक़सान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो कृपया निकटस्थ अस्पताल या आपातकालीन/आपदा प्रबंधन सेवा केंद्र या हेल्पलाइन से सम्पर्क करें।