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अनहेल्दी मास्टरबेशन को काबू में करने के तरीके

जब हम अपनी बॉडी को एक्सप्लोर करने और सेक्शुयल अर्ज को जानने की शुरुआत करते हैँ, तब हम आगे बढ़ने से पहले अपनी बॉडी और उसकी इच्छाओं के साथ शुरु करते हैँ और अन्य लोगों के साथ इसका एक्सपीरियंस करते हैं। मास्टरबेशन तब तक एक हेल्दी एक्टिविटी है, जब तक यह रोजाना के कामकाज के लिए समस्या न बन जाए। सेफ और बेटर सेक्शुयल लाइफ की चाबी हेल्दी और अनहेल्दी मास्टरबेशन के बीच की लाइन बहुत पतली है।

टीनएज हमारी ज़िंदगी के सबसे क्रूशियल दौर में से एक है, और ये अवस्था हमारी ज़िंदगी में कई बदलाव लाती है जिसमें फिजिकल, सेक्शुयल, सोशल, मेंटल, इमोशनल और इंटरपर्सनल आदि बदलाव शामिल हैं। और इस उम्र में टीनएजर का अपनी बॉडी की सेक्शुयल क्षमताओं को जानने और अपने बॉडी पार्ट्स को समझना आम बात है। और इसीलिए खुद को जानने के लिए वे अक्सर मास्टरबेशन का सहारा लेते हैं जो कि एक बिल्कुल नार्मल और नेचरल प्रोसेस है।

मास्टरबैशन सेल्फ स्टिम्युलेशन और सेक्शुयल सेटिस्फेक्शन को पाने का एक अच्छा और सरल तरीका है, जो एक हद तक हमारे लिए हेल्दी भी है। लेकिन इसे कितनी बार किया जाए इसकी कोई नंबर लिमिट तय नहीं है बल्कि जब ये आदत आपकी रोज़मर्रा की चीज़ें जैसे स्कूल, वर्क, रिलेशनशिप, खुद का ध्यान रखने आदि कार्यों में दखल देने लगे तब समझ लेना चाहिए की हम लिमिट क्रॉस कर चुके हैं।

टीनएजर्स में मास्टरबेशन की आदत कई बार अन्य कारणों से भी लग सकती है जैसे उनके बचपन का कोई ट्रामा या डिप्रेशन जिसे वो भुला ना पा रहे हो। इस वजह से उनके अंदर गुस्सा निराशा, असहाय, गिल्ट जैसी अलग-अलग भावनाएं एक साथ महसूस हो रही हों जिससे वो और भी ज्यादा परेशान हो गए हो। जब उन्हें ऐसे में बाहर से कोई मदद नहीं मिलती है, तो वे खुद में ही उससे बचने का तरीका ढूढ़ने लगते हैं, जिसमें मास्टरबेशन करके उन भावनाओ को दबाना भी शामिल है।

मास्टरबेशन एक नशा इसीलिए भी बन सकता है क्योंकि ये सरल है, इससे टेंशन दूर होती है, इसे करते समय कोई पैसे भी व्यय नहीं होते, यह एक खुद से ही की जाने वाली प्रक्रिया है लेकिन सबसे ऊपर इससे हमें इसमें प्लेजर मिलता है। इसके माध्यम से टीनएजर अपनी भावनाओं की कश्ती को छोड़ कुछ समय के लिए एन्जॉय कर सकते हैं।

मास्टरबेशन से हमारे दिमाग में डोपामाइन और इंडोर्फिन्स हॉर्मोन्स रिलीज होते है, जो कि हमें अच्छा महसूस करने के साथ-साथ कुछ टाइम के लिए तनाव से भी छुटकारा दिलाते हैं और इससे हमारे दिमाग को सुखद अनुभव होता है। इसलिए दिमाग बार-बार हमसे इन हॉर्मोन्स की मांग करता है और ऐसे में बार-बार मास्टरबेशन करते-करते हम इसके आदी हो जाते है।

बाकी सारी लतों की तरह इस आदत से भी हम तभी छुटकारा पा सकते हैं जब हम इसे पहचाने और माने की हम इससे ग्रस्त हैं, और एक बार पहचान जाएं तो फिर बदलाव तो हम कर ही सकते हैं। और इसी आदत में बदलाव करने के लिए या इसे कम करने के कुछ उपाय हैं-

पोर्नोग्राफी देखना बंद करें : शुरू में हो सकता है आपको ये बहुत कठिन लगे लेकिन ये आपके भले के लिए ही है और आपको ये करना पड़ेगा।

कोई नई आदत बनाए : आप ऐसी एक्टिविटी की लिस्ट बना सकते हैं, जो आप सेल्फ स्टिम्युलेट अर्ज के समय अपना ध्यान भटकाने के लिए कर सकते हैं, आप ऐसी कोई आदत भी बना सकते हैं या चाहे तो कोई और फायदेमंद आदत डाल सकते हैं।

अकेले न रहें : अर्ज की भावनाएं अक्सर अकेलेपन में ही अपनी पीक पर होती हैं, इसलिए ज्यादा अकेले ना रहें बल्कि अपने परिवार, दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।

चिंतन करें : आप अपने मन को शांत करने के लिए चिंतन कर सकते हैं कि आखिर आपके जीवन में तनाव कहां है, आपके स्ट्रेस की जड़ आपके प्रोफेशनल, पर्सनल, सेक्शुयल, सोशल, इमोशनल, फिजिकल किसी भी क्षेत्र में हो सकती है।

छोटे से शुरुआत करें : इस आदत को एकदम से छोड़ने की बजाय आप छोटे से शुरुआत कर सकते हैं जैसे यदि आप अभी रोज़ मास्टरबेट करते हैं तो आप हफ्ते में एक दिन का संकल्प ले सकते हैं, उदहारण के तौर पर "इस हफ्ते में मंगलवार को मास्टरबेट करूंगा" और प्लान वाले दिन आप किसी दूसरे काम में व्यस्त हो जाए ताकि आप मास्टरबेशन ना कर पाएं।

खुद को पुरुस्कृत करें : अगर आप सच में उस दिन बिना मास्टरबेशन करे निकाल लेते हैं तो खुद को अवार्ड दे भले ही छोटा हो पर खुद को सराहना और पुरुस्कार देना चाहिए क्योंकि आपने उसके लिए मेहनत की है।

ध्यान रहे की लत कोई एक दिन में नहीं छोड़ी जाती इसीलिए थके नहीं और ना ही हार माने, और कभी अर्ज में आकर मास्टरबेशन कर भी लिया तो खुद को कोसे ना, क्योंकि आपका एक कदम भी आपकी सफलता की तरफ ही तो है।

स्टे फोकस्ड, स्टे स्ट्रांग, स्टे पॉजिटिव।

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पोर्नोग्राफी के बारे में सच जानें...

पोर्नोग्राफी की लत से छुटकारा पाने के टिप्स
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

माना जाता है कि पोर्न फिल्में देखना दिमाग पर गलत प्रभाव डालता है। लेकिन यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि पॉर्नोग्राफी रिलेशनशिप्स और यौन संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव भी डाल सकती है। 

पोर्न फिल्में एकांत में देखी जाने वाली चीजें हैं। यहां तक की इन फिल्मों की चर्चा भी दबे-छुपे शब्दों में ही की जाती है। चलिए इस साइकॉलॉजी को समझने की कोशिश करते हैं: 

टीनएज के दौरान बच्चे बढ़ रहे होते हैं उनका शारीरिक और मानसिक विकास हो रहा होता है। ऐसे में नई चीजों के बारे में जानने कि जिज्ञासा अधिक होती है। इसी के साथ यौन संबंध के बारे में वे अधिक जानना चाहते हैं। इसलिए वे लोगों से मिलना कम कर देते हैं और एकांत में रहना पसंद करते हैं। वो अकेले रहने के बहाने ढूंढते हैं ताकि पोर्न फिल्में देख सके। यहीं से पोर्न फिल्में जिंदगी का हिस्सा बनने लगती हैं। 

सैक्सुओलॉजिस्ट डॉ. रंजन भोसले बता रहे हैं वो 4 स्थितियां जब पॉर्नोग्राफी हमारे जिंदगी में दाखिल होने लगती है।

1) लत: एक-दो बार देखने के बाद कई टीनएजर्स को इसकी लत लग जाती है और वो इसे लगभग हर रोज देखने लगते हैं।

2) ज्यादा से ज्यादा सामग्री: लत के अलावा वे इसे लेकर और खोज-बीन करने लगते हैं।

3) आम जरूरत बनना: पहली बार जब इसे देखते हैं तो उन्हें ये चौंकाने वाला लगता है। लेकिन बाद में ये आम लगने लगता है और इसे इस तरह से देखा जाता है जैसे कोई आम फिल्म देखी जा रही हो। 

4) सेक्सुअली एक्टिंग करना: पोर्नोग्राफी में देखे गए व्यवहारों को निभाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

इन सभी का असर टीन की जिंदगी पर पड़ने लगता है। इनका असर कुछ इसतरह से जिंदगी पर होता है कि वो या तो पॉर्न स्टार बनने की ख़्वाहिश मन में पालने लगते हैं।

शोध में सामने आया है कि पॉर्नोग्राफी का गहरा असर टीन की जिंदगी पर पड़ता है। उनके बर्ताव में ये साफ दिखाई देने लगता है। इसके अलावा पॉर्नोग्राफी सेक्स एक्टीविटीज की तरफ बढ़ाती है। ये वैश्यावृत्ती और रेप जैसे अपराधिक मामलों में फंस जाते हैं। ऐसे ये जरूरी है कि टीनएज में बच्चों को सेक्स एजुकेशन दी जाए। 

Teentalk India एक्सपर्ट क्षितिज सावंत से जानिए पोर्नोग्राफी की लत से छुटकारा पाने के टिप्स:

1.सेक्स एजुकेशन जरूरी है। जब भी, आपको सेक्स एजुकेशन पर पाठ्यक्रम, कार्यक्रम या सेमिनार में भाग लेने का अवसर मिले, तो इसका हिस्सा जरूर बनें। इससे आपको सेक्स और प्रजनन प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी।

2. ज्ञान शक्ति है: एक बार जब आपको आवश्यक ज्ञान हो जाएगा, तो आपको पता चल जाएगा कि सेक्स किस तरह की परिस्थितियों में उपयुक्त है और कुछ अन्य स्थितियों में अनुचित है। यह कुछ ऐसा नहीं है जो ’गंदा’ है, बल्कि कुछ ऐसा है जिसे जीवन जीने के तरीके के रूप में स्वीकार करना होगा।

3. हॉबी अपनाएं: इस लत से पीछा छुड़ाने के लिए कोई हॉबी अपनाएं। डांस, स्पोर्ट या लेखन के काम में मन लगाएं। 

4. जब भी पोर्न देखने का मन करे तो गहरी साँस लें और ध्यान लगाएं। यह आपको शांत रहने में मदद करेगा।

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