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सेल्फी लेना कूल है, मरना नहीं

एक्सपर्ट के अनुसार, सेल्फी लेने से टीन्स को 15 सेकंड की प्रसिद्धि मिलती है

द इंडिपेंडेंट न्यूज़पेपर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों में दुनिया भर में सेल्फी से होने वाली सभी डेथ में से 60 प्रतिशत भारत में हुई। स्टडी में यह पाया गया कि मार्च 2014 से सितम्बर 2016 की ‘सेल्फी लेने के चक्कर में यह मौतें हुईं।’

सभी पेरेंट्स ने अपने टीनेज बच्चों को कई बार इस बात के लिए टोका होगा कि वे हर वक़त अपने फ़ोन से न चिपके रहें। आज की जनरेशन डिजीटल दुनिया को ज्यादा अच्छे से समझती है वहीं पेरेंट्स और ग्रैंडपैरेंट्स के लिए यह बिलकुल नई चीज़ है।

लेकिन इस बात को लेकर भी हमें सरप्राइज़ नहीं होना चाहिए कि फ़ोन गुम जाने पर आज की जनरेशन पुराणी जनरेशन से कहीं अधिक बुरी तरह से टेंशन में आ जाती है।

उदाहरण के लिए, मुंबई में चलती लोकल ट्रैन से एक लड़की ने सिर्फ इसलिए जंप लगा दी क्यूंकि उसका फ़ोन ट्रैन से बाहर गिर गया था। मुंबई में ही एक दूसरे  केस में एक लड़का मरीन ड्राइव पर सेल्फी लेने के चक्कर में डूब गया। आज यह सिचुएशन आ गई है कि सिटी पुलिस को इन सेल्फी पॉइंट्स पर पुलिस बंदोबस्त करना पड़ रहा है।

टीनेजर्स क्यों इस तरह सेल्फी के एडिक्ट हो गए है? इस विषय पर हमने टीन टॉक इंडिया की एक्सपर्ट क्षितिजा सावंत से बात की। उन्होंने कहा, ‘यह उन्हें कुछ वक़्त के लिए एक फिल्म स्टार की तरह फील करवाता है। 15 मिनट का फेम। आप सोशल मीडिया पर उस सेल्फी को अपलोड कर छोटा फिल्म स्टार बन सकते है।

यह थोड़ी देर का फेम इतना स्ट्रोंग होता है कि वे उसके अलावा और कछ देख या सोच नहीं पाते।’

सेल्फी से होने वाली डेथ को रोकने की कुछ टिप्स

1. आप सेफ रहकर भी सेल्फी ले सकते है। आपको किसी डेंजरस जगह पर जाकर सेल्फी लेने की ज़रूरत नहीं है।

2. यदि आप ऐसी किसी डेंजरस जगह पर जाते भी है तो सबसे पहले यह देखें की वहां से गिरने का कोई रिस्क तो नहीं।

3. आपकी लाइफ सेल्फी से कहीं ज्यादा ज़रूरी है।

4. नेचुरल ब्यूटी के साथ अपनी सेफ्टी का भी ध्यान रखें।

5. और लास्ट में, चलते हुए वाहन से फ़ोन गिर जाने के कारण जंप न करें।

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इस समय न करें मोबाइल यूज

अक्सर ऐसा होता है कि हम सुबह बिस्तर से उठते हैं और सबसे पहले अपने मोबाइल फोन पर नोटिफिकेशन चैक करते हैं कि हमारे आसपास क्या अच्छा या बुरा हो सकता है। इससे भी ज्यादा यह जानना चाहते हैँ कि हमने इंस्टाग्राम पर जो फोटो पोस्ट की है, उस पर कितने लाइक्स मिले.... एक रिसर्च के अनु्सार यह हेल्दी हेबिट नहीं है। यह एक एडिक्शन है-
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

कुछ कॉमन हेबिट्स

1. बेड पर जाने से पहले

लेटनाईट  कन्वर्सेशन  का  अपना चार्म होता है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन  नींद पूरी नहीं होने से सुबह आप अपने को फ्रेश फील नहीं कर पाते। ऐक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि मोबाइल फोन कि स्क्रीन हार्मोन्स पर बुरा प्रभा्व डालती है।

2. जरूरी है कंट्रोल

अधिकतर साइकोलॉजिस्ट यह एड्वाइ्स देते हैं कि कुछ पर्टिक्युलर टाइम में फोन का यूज़ नहीं करे तो बेहतर होगा, हालांकि बदलते समय में ऐ्सा करना चल्लेंजिंग है। उ्स समय जब आपको कि्सी से अर्जेंट बात करती हो या कोई इम्पोर्टेंट मै्सेज भेजना हो, ऐ्स में मोबाइल से दूर रहना काफी मुश्किल हो जाता है।

3. सुबह उठने के बाद

सोने जाने से पहले और सुबह सोकर उठने के बाद भी यदि मोबाइल फोन चेक नहीं करते तो हमें कुछ अजीब-सा महसूस होने लगता है और फाइनली हम अपना फोन चेक कर ही लेते  हैं। यह भी एक एडिक्शन है।

4. इवेंट एंजॉय करें

बहुत-से लोग अपने गुड मूमेंट्स और मेमोरीज कि ढेर सारी पिक्चर्स अपने मोबाइल पर क्लिक करते हैं। यह एक अच्छा तरीका  है कि्सी भी मेमोरी को सेव करने का, लेकिन सोशल मीडिया में पोस्ट करने के लिए फोटो लेने में ही हम पूरा समय यु ही बर्बाद कर देते हैं और ऐसे में इवेंट को एंजॉय नहीं कर पाते।

5. फे्स-टू-फे्स कन्वर्सेशन

अपने फ्रेंड से चैटिंग करते समय चाहे वह लड़का हो या लड़की, अपने गहरे थॉट्स आपस में शेयर करते हैं। ऐसे में बहुत ज्यादा ध्यान देने कि जरूरत होती है कि आप क्या टेक्स्ट लिख रहे हैं। साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि चॅटींग करने से ज्यादा बेहतर है फे्स-टू-फे्स कन्वर्सेशन, वह भी  मोबाइल या वीडियो कॉल पर नहीं।

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