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एंट्रेंस एग्ज़ाम में नाकामी का कैसे करें सामना

नाक़ामयाबी सभी को परेशान करती है। लेकिन यह ज़रूरी है कि आप ख़ुद पर क़ाबू रखें और डिगें नहीं। इस आर्टिकल में आपको कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं, जो एग्ज़ाम में नाकामी का सामना करने में आपकी मदद करेंगे।

यह सच है कि सफलता मेहनती और मज़बूत इरादे वालों को ही मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जो नाकाम होते हैं, उन्होंने मेहनत नहीं की थी। अल्बर्ट आइंस्टीन इसका उदाहरण हैं। वे जब 17 साल के थे, तब यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में फेल हो गए थे। जबकि आगे चलकर वे सदी के सबसे उत्कृष्ट वैज्ञानिकों में से एक माने गए। ख़राब रिज़ल्ट या नाकामी का मतलब कभी फु़लस्टॉप नहीं होता है, यह एक कॉमा की तरह है, जो आपको अपनी मंज़िल की ओर ले जाता है। 

आप सीबीएसई, आईसीएसई या किसी भी स्टेट बोर्ड्स के स्टूडेंट हों- बेहतर प्रदर्शन करने को लेकर पहले से ही प्रेशर में होते हैं। और इसके साथ ही एक और मांग होती है प्रतियोगी परीक्षा में अच्छा स्कोर करने की। ज़ाहिर है अच्छी रैंक हासिल करना आसान नहीं होता है। ऐसी स्थिति में ख़राब प्रदर्शन हमें हताश कर सकता है। यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं, जो आपको हौसला देंगे। यह कभी नहीं भूलिए कि ज़िंदगी में निराशा का सामना करना एक सामान्य बात है।

-सबसे पहले इस बारे में बहुत अधिक सोचना बंद करने की कोशिश करें। यक़ीनन उस स्थिति में तुरंत ऐसा करना बहुत कठिन होता है मगर इस फै़क्ट को समझने की कोशिश कीजिए कि एक नाकामी से सब ख़त्म नहीं हो जाता। यह अंत नहीं है, यह एक नई शुरुआत भी हो सकती है। यदि आप किसी एग्ज़ाम में अच्छे नम्बर हासिल नहीं कर पाए तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कोशिशें करना छोड़ देना चाहिए। इस समय आपको बस नाकामी के बारे में सोचना बंद करना चाहिए। इस बात को समझने की कोशिश करें कि दु:खी होने से आपके नम्बर नहीं बढ़ने वाले हैं।

-अपने स्टडी ज़ोन से ध्यान हटाने की कोशिश करें। आप अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ अधिक से अधिक समय बिता सकते हैं। शॉर्ट में कहूं तो जो चीज़ें और माहौल आपको तनाव दे सकते हैं, उनसे दूर रहने की कोशिश करें।

-जितना सम्भव हो, अपने साथ अच्छा व्यवहार करें। इसमें झिझकने की कोई ज़रूरत नहीं है। किसी भी दूसरे इंसान की तुलना में आप ख़ुद को बेहतर जानते हैं। आप बेहतर ढंग से समझ सकते हैं कि आपको किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है। ऐसे में वही चीज़ें करना बेहतर है, जिनसे आपको सुकून मिले। जब आप पूरी तरह इस स्थिति से बाहर आ जाएं तो अपनी तैयारी दोबारा शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं।

और यह ध्यान रखें कि हर हाल में ख़ुद पर भरोसा बनाए रखने से ही ज़िंदगी में क़ामयाबी मिलती है।

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टीनएजर्स कैसे पढ़ाई के साथ हॉबीज फॉलो करें ?

आसान टिप्स के जरिए पढ़ाई के साथ शौक को भी रखे जारी
Richa DubeyTeentalkindia Content Writer

टीनएज में पढ़ाई के साथ अपनी हॉबीज को बनाएं रखना भी एक अहम काम है। यहां हम आपको कुछ टिप्स दे रहे हैं जिनकी मदद से आप पढ़ाई के साथ-साथ अपनी हॉबीज को भी अच्छी तरह से फॉलो कर सकेंगे।


टीनएज में बच्चे शारीरिक और मानसिक बदलाव से गुजरते हैं। इस आर्टिकल के जरिए हम टीनएज बच्चों की उलझनों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल इस उम्र में बच्चे अपनी जिंदगी के अहम मोड़ से भी गुजरते हैं, जब उन्हें अपने शौक और पढ़ाई में से किसी एक को चुनना होता है। पढ़ाई जहां एक तरफ अच्छे मार्क्स लाने और अपने करिअर को सही दिशा देने के लिए जरूरी है। ठीक उसी तरह हॉबीज पर्सनालिटी को निखारने मदद करती है। इसके अलावा ये करिअर का एक अन्य विकल्प भी हो सकती है। हर किसी की हॉबीज अलग-अलग होती हैं। पढ़ाई के साथ अपनी हॉबी से जुड़े रहना लाइफ को अलग तरह से आगे बढ़ने में करता है।
यहां कुछ टिप्स हैं जिनकी मदद से आप पढ़ाई के साथ अपनी हॉबी से जुड़े रहेंगे।
लक्षय तय करिए और प्लान बनाइए
नॉर्मन विंसेंट पील का एक फेमस कथन है- 'हर सफल व्यक्ति को अपना लक्ष्य पता होता है। सफलता तब तक नहीं मिलती है जब तक ये ना पता कि जीवन में हमें कहां जना है और क्या हासिल करना है।'
ये बिलकुल सही कहा गया है- अगर आपके पास लक्ष्य नहीं हैं तो आप सफल नहीं हो सकते हैं। इसलिए सबसे लक्ष्य निर्धारित करें और अपने शौक को समय जरूर दें। इसके बाद आप आसानी से पढ़ाई के साथ अपने शौक के लिए समय निकाल पाएंगे।
आप उन लोगों के साथ वक्त बिताएं जिनकी हॉबीज आपकी तरह हैं
अपनी हॉबी को बनाएं रखने के लिए इसे लेकर ज्यादा तनाव ना लें। क्योंकि हॉबीज हमेशा ही तनाव को कम करती है। अपनी हॉबी को जारी रखने के लिए परिवार और दोस्तों के साथ इसे आगे बढ़ाएं। इसके बाद क्लब या क्लासेस ज्वाइन करें।
अपनी हॉबी से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुप ज्वाइन करें और प्रोफेशनल लोगों को फॉलो करें
खुद को डीमोटीवेट होने से बचाना बहुत जरूरी है। फील्ड प्रोफेशनल्स डीमोटीवेट होने से बचाते हैं। किसी भी चीज की शुरुआत करने पर आप उसमें एक दम नए होते हैं, तो पर्फेक्ट होने का तो सवाल ही नहीं उठता है। ऐसे में प्रोफेशनल्स को फॉलो करना लक्षय हासिल करने में मदद करता है।
प्रोटेक्शन रखना अच्छी बात है, लेकिन ये इतनी भी जरूरी नहीं है
शुरुआत में दिक्कतें महसूस होंगी। क्योंकि आपको पढ़ाई के साथ हॉबी को जारी रखने की आदत नहीं हैं, लेकिन खुद को थोड़ा वक्त देने के बाद ये काफी आसान लगने लगेगा। अंत में यही कहना हैं कि आपको खुद पर किसी भी तरह का प्रेशर फील करने की जरूरत नहीं है। पढ़ाई के साथ हॉबीज को जारी रखना आपकी पर्सनालिटी को निखारने के लिए ये बेहद जरूरी है। आप हॉबीज और पढ़ाई को साथ में लेकर चलिए, इससे करिअर चुनते वक्त आपको परेशानी नहीं होगी। अपनी स्किल्स को सुधारने के लिए अपने परिवार और दोस्तों से उनकी राय जरूर लें। इसके अलावा खुद का आंकलन भी करें।

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