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परीक्षा के पहले ये चीज़ें करें

परीक्षा के पहले वाली रात बेहद तनावपूर्ण होती है। फिर भी तनाव नहीं लीजिए, अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए, बाक़ी सब भूल जाइए

जीवन में ऐसी कई बातें होती हैं, जिनकी वजह से चिंता और तनाव बढ़ जाता है। परीक्षा से पहले वाली रात उनमें से एक है।

हमारे टीनटॉक एक्सपर्ट ने कुछ विचार साझा किए हैं। इनमें से कुछ चीज़ें परीक्षा के पहले होने वाले तनाव को दूर करने में मददगार साबित होंगी।

समय का उपयोग करें : 
आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपके पास सीमित समय है, इसलिए समझदारी के साथ ऐसे पढ़ें कि याद रख सकें। यह आप कई अलग-अलग तरीक़ों से कर सकते हैं। आप अपने नोट्स को एक बार दोबारा देख लें, सिलेबस में मौजूद विषय के हिसाब से प्वाइंट टु प्वाइंट रिवाइज़ कर लें। किसी दोस्त की मदद से एक बार देख लें कि कहीं कुछ ज़रूरी चीज तो नहीं छूट गई है।

बहुत ज़्यादा रिवाइज़ न करें :  
परीक्षा के पहले की रात को रिवाइज़ करना ज़रूरी है, लेकिन यह बहुत ज़्यादा न करें। क्योंकि अधिक दबाव में आने पर भी दिमाग़ काम करना बंद कर देता है। बेहतर होगा कि रिलेक्स हो जाएं। किताब को बंद कर आराम करने की कोशिश करें। पेपर के बारे में ज़्यादा न सोचकर जो भी आता है, उसे दिमाग़ में जमा होने के लिए समय दीजिए।

अच्छे प्रदर्शन पर भरोसा रखिए :
कुछ वक़्त सकारात्मक बातों के बारे में सोचने से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। अगर आप सोचें कि आपका पेपर अच्छा गयाहै तो निश्चित ही चिंता कम होगी। परीक्षा से पहले की शाम को इससे मूड बेहतर होगा।

खु़द पर ध्यान केंद्रित कीजिए : 
सबसे पहले खु़द पर ध्यान केंद्रित कीजिए और अपनी तुलना दूसरों से न करें। कई बार पैरेंट्स और स्टूडेंट्स दोनों ही यह ग़लती करते हैं कि वे परीक्षा के पहले और बाद में अन्य दोस्तों से तुलना करने लगते हैं। इससे अनचाहा दबाव बनने लगता है। आत्मविश्वास का स्तर भी गिरने लगता है। पैरेंट्स बच्चों को यह याद दिलाने में मदद करें कि वो ऐसा क्या करें, जिससे बच्चे आत्मविश्वास बढ़ा सकें और अच्छा प्रदर्शन कर सकें।  

चुनौती के रूप में लें, ख़तरे के रूप में नहीं :  
अगर परीक्षा को आप एक ख़तरे के रूप में देखेंगे तो तय है कि इससे डर लगेगा और आत्मविश्वास में कमी महसूस होगी। इसका असर परीक्षा के नतीजों पर होगा। इसके बजाय इसे एक चुनौती की तरह सोच सकते हैं, जिससे आप ख़ुद को मोटिवेट करेंगे और तनाव कम महसूस होगा।

पर्याप्त ऊर्जा पाएं : 
एक कहावत है कि अगर हमारा पेट पूरा भरा हो तो दिमाग़ भी अच्छे से काम करता है। परीक्षा की एक रात पहले सेहतमंद और सही पोषण वाला भोजन करना चाहिए, जिससे मस्तिष्क को ऊर्जा मिलेगी। कई रिसर्च से यह साबित हुआ है कि कुछ फ़ूड ऐसे हैं, जिन्हें खाने से याद रखने में मदद मिलती है।

रात को अच्छी नींद लें :  
कहीं पेपर ना बिगड़ जाए, यह सोचने से तनाव भी बढ़ेगा और नींद में भी ख़लल पड़ेगा। पर्याप्त और अच्छी नींद का परीक्षा में प्रदर्शन पर सकारात्मक असर होता है। इससे याददाश्त बेहतर रहती है और एकाग्रता भी बढ़ती है।   
 

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जानिए रटकर सीखने के बारे में सब कुछ

रटकर सीखना पढ़ाई का वह हिस्सा है, जिसे एजुकेशन सिस्टम से बाहर नहीं किया जा सकता है। हालांकि यह आदर्श तरीक़ा नहीं है, फिर भी इसके अपने फ़ायदे हैं। तो जानते हैं इस आर्टिकल में रटकर सीखने के फ़ायदे और नुक़सान दोनों के बारे में।
Snigdha Teentalkindia Counsellor

यदि हम पढ़ाई की बात करें तो परीक्षा की तैयारी के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें एक प्रमुख तकनीक रटकर याद करना भी है। रटकर सीखना याद रखने की तकनीक के रूप में जानी जाती है, जो कि रिपीटेशन यानी बार-बार पढ़कर रटने का तरीक़ा है। इसमें किसी भी चीज़ को हम तब तक बार-बार पढ़ते हैं, जब तक कि वह हमें अच्छे से याद होकर हमारे दिमाग़ में न बैठ जाए। हम सभी ने ही रटकर सीखने के इस तरीके़ का प्रयोग अपने बचपन में किया है। अल्फ़ाबेट, गिनती, राइम्स, दिनों के नाम, महीनों के नाम, टेबल और स्पेलिंग याद करने के लिए हमने इस तकनीक का प्रयोग किया तो हाईस्कूल में पढ़ाई के दौरान केमिस्ट्री में केमिकल एलिमेंट या गणित में फ़ार्मूले याद रखने के लिए भी यही जुगत अपनाई।

पैरेंट्स और शिक्षक बचपन के शुरुआती वर्षों में बच्चों को याद कराने के लिए इस तरीक़े को अपनाते हैं और बाद में यह एक आदत बन जाती है। यह सीखने का अच्छा उपाय हो सकता है यदि इसके पीछे के कॉन्सेप्ट को समझा जाए। हाल ही में पढ़ाई की नई तकनीकों जैसे एसोशिएटिव लर्निंग, मेटा कॉग्निशन और क्रिटिकल थिंकिंग ने अब रटकर सीखने यानी रोटा लर्निंग की जगह ले ली है।

हमारे टीनटॉक एक्सपर्ट बता रहे हैं आपको रटकर सीखने के फ़ायदे और नुक़सान के बारे में :

फ़ायदे : 

-चीज़ों को याद करने और याद रखने का आसान तरीक़ा।
-रटकर याद करने में चीज़ें हमारी याददाश्त में जमा हो जाती हैं और जब हमें उनकी ज़रूरत हो हम उनका उपयोग कर सकते हैं।
-इस तकनीक को अपनाने और उपयोग करने से किसी समस्या के समाधान में मदद मिलती है।
-अल्फ़ाबेट, नम्बर, शब्दों को याद करने में यह बच्चों के लिए मददगार है।
-स्पेशल बच्चों को पढ़ाने के लिए रटकर याद रखने के ही तरीक़े का प्रयोग किया जाता है।
-विदेशी भाषाओं को सीखने में भी इस तकनीक का प्रयोग मददगार है।
-यह तकनीक नींव बनाने में मदद करती है, जो चीज़ों को सीखने और समझने में भी उपयोगी है।
-इसमें किसी अन्य सोर्स की रेफ़रेंस के रूप में उपयोग करने की ज़रूरत नहीं होती है।
-यह हमारे ज्ञान को क्वांटिटिव रूप में यानी अधिक मात्रा में बढ़ाता है।

नुक़सान :

-अगर लम्बे समय तक इसकी आज़माइश न की जाए तो भूलने की गुंजाइश बनी रहती है।
-इसमें याद रखने के लिए चीज़ों को बार-बार दोहराना होता है, ऐसे में तथ्यों को समझने में व्यक्ति कम ध्यान लगा पाता है।
-इसमें समझकर याद करने की सम्भावना कम होती है।
-जिन चीज़ों को याद करना है, उनके पीछे के कॉन्सेप्ट को समझने का मौक़ा हमें यह तकनीक नहीं देती है।

रटकर सीखना शिक्षा व्यवस्था का एक ऐसा हिस्सा है, जिसे एजुकेशन सिस्टम से न ही पूरी तरह अलग किया जा सकता है और न ही अनदेखा किया जा सकता है। साथ ही यह हर जगह सही भी नहीं है। हालांकि इसे सीखने की अन्य तकनीकों जैसे विचारों या मायनों को महत्व देने वाली विधि से जोड़ सकते हैं। इनमें हमें तथ्यों को सही ढंग से समझते हुए सही सोच का विकल्प मिलता है। अगर हम सीखने की अन्य तकनीकों के साथ इसका उपयोग करें तो हमें अधिक बेहतर नतीजे मिलेंगे।
 

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