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क्लास में अच्छी तरह नोट्स कैसे लें

आप स्कूल में पढ़ रहे हों या कॉलेज में हो, नोट्स लेना स्टूडेंट्स की रोज़ाना की दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है…

पढ़ाना और सीखना अब दोनों ही एक अलग स्तर पर जा चुके हैं। अब एप्रोच भी अधिक इंटरेक्टिव और विस्तृत है। नोट्स लेना पढ़ाई में सफलता के लिए बहुत ज़रूरी हो गया है। बात चाहे स्कूल की हो, कॉलेज या कोचिंग की, नोट्स सभी जगह अपनी उपयोगिता बनाए हुए हैं। लेकिन नोट्स लेने और अच्छी तरह से नोट्स लेने में बड़ा महत्वपूर्ण अंतर है। नोट्स लेने का मतलब सिर्फ़ यह नहीं होता कि जो शिक्षक कह रहा है उसे लिख लिया जाए, बल्कि यह उन चीज़ों का एक ऐसा ड्राफ़्ट तैयार करना है, जिन्हें टीचर्स क्लास में बताने की कोशिश करते हैं।

कई स्टूडेंट्स इस बात की शिकायत करते हैं कि वे क्लास में तो पढ़ाया हुआ अच्छे से समझ लेते हैं, मगर जब नोट्स बनाते हैं तो कई ज़रूरी प्वाइंट्स छूट जाते हैं। वैसे यह कोई बहुत अजब बात नहीं है कि जब लेक्चर दिया जा रहा तो स्टूडेंट्स अच्छे नोट्स न बना सके। इसके लिए यहां टीनटॉक एक्सपर्ट द्वारा कई ज़रूरी टिप्स दिए जा रहे हैं, जिनका प्रयोग आप क्लासरूम में प्रभावी नोट्स बनाने में कर सकते हैं।

लेक्चर के पहले :  
एक बड़ी लूज़ नोटबुक लीजिए और इसमें पेपर के एक साइड ही लिखें। अब अपने नोट्स का ऐसा खाका बनाएं कि क्लास में जो पढ़ाया गया है उसे पूरी तरह कवर किया जा सके और अगर बाद में कुछ जोड़ना हो तो उसमें जोड़ा जा सके। अपनी नोटबुक में मार्जिन (लेफ़्ट साइड में ढाई इंच जगह) छोड़िए, ताकि यदि बाद में कुछ याद आए तो उसे जोड़ा जा सके।

लेक्चर के बीच में : 
नोट्स को बुलेट प्वाइंट के रूप में लिखिए। प्रमुख विचारों को लिखें, न कि सबको। उन लाइनों को छोड़ दीजिए जिनके अंत में आइडिया या विचार हों। वॉट्सएप की भाषा का प्रयोग करें और कट टु कट लिखें, जिसे बाद में आसानी से समझा जा सके। महत्वपूर्ण प्वाइंट और कीवर्ड को अंडरलाइन करें।

लेक्चर के बाद में : 
अपने नोट्स बनाने के तुरंत बाद उन्हें पढ़कर देखें ताकि भविष्य में किसी भी तरह का कंफ्यूजन न हो। नोट़्स में ज़रूरत के अनुसार कॉलम जोड़ें और उन्हें ऐसे लिखें कि बाद में भी आसानी से समझ और पढ़ सकें। उन आइडिया या कीवर्ड को रिकॉर्ड करें, जो पूरे लेक्चर को याद दिलाने में मदद करें। आपको अपने शिक्षक के विचारों को दोबारा पढ़कर देखना होगा और उसमें अपने शब्दों को समाहित करना होगा।

अगर लेक्चर अभी भी दिमाग़ में ताज़ा है, तो आप अपनी मेमोरी में कई फै़क्ट और उदाहरण शामिल कर सकते हैं, जो लेक्चर के दौरान छूट गए थे। इसके अलावा आप याद कर सकते हैं कि आपके कौन-से विषय क्लीयर नहीं हुए थे, जिनके बारे में आप अपने क्लासमेट या शिक्षक से बातचीत कर सकते हैं।

लम्बे समय के बाद रिव्यू करने के बजाय तुरंत रिव्यू करने के बेहतर नतीजे होते हैं। लेक्चर के 24 घंटे के भीतर या किसी दूसरे लेक्चर के पहले रिव्यू न करें तो आपकी याददाश्त से वह मिट जाएगा और आप रिव्यू नहीं कर सकेंगे।

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एंट्रेंस एग्ज़ाम में नाकामी का कैसे करें सामना

नाक़ामयाबी सभी को परेशान करती है। लेकिन यह ज़रूरी है कि आप ख़ुद पर क़ाबू रखें और डिगें नहीं। इस आर्टिकल में आपको कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं, जो एग्ज़ाम में नाकामी का सामना करने में आपकी मदद करेंगे।
Richa DubeyTeentalkindia Content Writer

यह सच है कि सफलता मेहनती और मज़बूत इरादे वालों को ही मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जो नाकाम होते हैं, उन्होंने मेहनत नहीं की थी। अल्बर्ट आइंस्टीन इसका उदाहरण हैं। वे जब 17 साल के थे, तब यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में फेल हो गए थे। जबकि आगे चलकर वे सदी के सबसे उत्कृष्ट वैज्ञानिकों में से एक माने गए। ख़राब रिज़ल्ट या नाकामी का मतलब कभी फु़लस्टॉप नहीं होता है, यह एक कॉमा की तरह है, जो आपको अपनी मंज़िल की ओर ले जाता है। 

आप सीबीएसई, आईसीएसई या किसी भी स्टेट बोर्ड्स के स्टूडेंट हों- बेहतर प्रदर्शन करने को लेकर पहले से ही प्रेशर में होते हैं। और इसके साथ ही एक और मांग होती है प्रतियोगी परीक्षा में अच्छा स्कोर करने की। ज़ाहिर है अच्छी रैंक हासिल करना आसान नहीं होता है। ऐसी स्थिति में ख़राब प्रदर्शन हमें हताश कर सकता है। यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं, जो आपको हौसला देंगे। यह कभी नहीं भूलिए कि ज़िंदगी में निराशा का सामना करना एक सामान्य बात है।

-सबसे पहले इस बारे में बहुत अधिक सोचना बंद करने की कोशिश करें। यक़ीनन उस स्थिति में तुरंत ऐसा करना बहुत कठिन होता है मगर इस फै़क्ट को समझने की कोशिश कीजिए कि एक नाकामी से सब ख़त्म नहीं हो जाता। यह अंत नहीं है, यह एक नई शुरुआत भी हो सकती है। यदि आप किसी एग्ज़ाम में अच्छे नम्बर हासिल नहीं कर पाए तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कोशिशें करना छोड़ देना चाहिए। इस समय आपको बस नाकामी के बारे में सोचना बंद करना चाहिए। इस बात को समझने की कोशिश करें कि दु:खी होने से आपके नम्बर नहीं बढ़ने वाले हैं।

-अपने स्टडी ज़ोन से ध्यान हटाने की कोशिश करें। आप अपने दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ अधिक से अधिक समय बिता सकते हैं। शॉर्ट में कहूं तो जो चीज़ें और माहौल आपको तनाव दे सकते हैं, उनसे दूर रहने की कोशिश करें।

-जितना सम्भव हो, अपने साथ अच्छा व्यवहार करें। इसमें झिझकने की कोई ज़रूरत नहीं है। किसी भी दूसरे इंसान की तुलना में आप ख़ुद को बेहतर जानते हैं। आप बेहतर ढंग से समझ सकते हैं कि आपको किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है। ऐसे में वही चीज़ें करना बेहतर है, जिनसे आपको सुकून मिले। जब आप पूरी तरह इस स्थिति से बाहर आ जाएं तो अपनी तैयारी दोबारा शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं।

और यह ध्यान रखें कि हर हाल में ख़ुद पर भरोसा बनाए रखने से ही ज़िंदगी में क़ामयाबी मिलती है।

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