लॉग इन करें
This site is not collecting any personalized information for ad serving or for personalization. We do not share any information/cookie data about the user with any third party.OK  NO

एंग्जाइटी से बाहर आने का प्लान बनाएं

17 साल की टीनएजर गर्ल लक्ष्या आर्या जो अभी 12वी क्लास में पढ़ रही हैं, उन्होंने अपनी फीलिंग्स को टीनटॉक इंडिया एक्सपर्ट के संग शेयर किया है..

"कोरोना वायरस की दूसरी लहर के साथ देश के हालात बहुत खराब थे। पहला और दूसरा लॉकडाउन ऐसा था कि जिसे पूरी दुनिया से हम बिल्कुल अलग हो गए हों। न्यू नॉर्मल ऐसा था कि अब इसके संग ही रहना है।  
दूसरी लहर के आने से पहले कक्षा 12वी के स्टूडेंट्स ने जब अपने फाइनल ईयर के स्कूल की शुरुआत पूरी लगन और डेडीकेशन के साथ की ही थी। तो हमारे ऑप्टीमिस्टिक नेचर ने ही हमें इस दिशा में आगे बढ़ने में मदद की थी। स्कूल खुलने की खबर सुनने के बाद कुछ खुश थे तो कुछ चिड़चिड़ा भी रहे थे। हम फाइनली फिर से लर्निंग के सामान्य तरीके को लेकर उत्साहित थे।


लेकिन, मुझे लगता है, किस्मत हमारे साथ नहीं थी। कोरोना की दूसरी लहर सुनामी की तरह हमसे टकराई और हम फिर से पढ़ाई के अपने ऑनलाइन मोड में वापस आ गए। इसके अलावा, हमारे समर वेकेशन को भी प्रीपोन्ड कर दिया गया था क्योंकि डेथ रेट हर दिन बड़ी तादाद में बढ़ रही थी। हम एक बार फिर अपने घरों में कैद हो गए। लेकिन इस बार कभी न खत्म होने वाले कामों के साथ दुख और मातम का माहौल भी था। हम स्टूडेंट्स ने बिना किसी ब्रेक के पूरे टाइम बिना थके  काम किया, अकेडमिक प्रेशर ने हमारी लाइफ पर बहुत ज्यादा असर डाला।
मैं अपनी मेंटल हेल्थ को बिगड़ता हुआ फील कर सकती थी। लोगों से मिलने और वर्क फिनिश करने की लगातार बढ़ती डेडलाइन और इस सब का प्रेशर अनरियल सा लगने लगा था। मेरी एंग्जाइटी और स्ट्रेस लेवल हर दिन लगातार बढ़ रही थी। मोनोटोनोस वर्क के बीच कोई ब्रेक नहीं था। ब्रेकडाउन और पेनिकिंग अब हर दिन की बात हो गई थी।
ऐसा सिर्फ मेरे साथ नहीं हो रहा था, मेरी उम्र के लगभग हर व्यक्ति के संग ऐसा ही हो रहा था। हम असहाय महसूस कर रहे थे। हमें अब कुछ भी एक्साइटिंग नहीं लग रहा था। हम सभी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करते हुए डल और थके हुए चेहरों के साथ अपनी कुर्सियों पर लेट गए। हमें बस एक ब्रेक की जरूरत थी।"


लक्ष्या ने जिन विचारों और फीलिंग्स को एक्सपीरियंस किया वो उसके जैसे अन्य स्टूडेंट्स ने भी महसूस किया। एक बहुत छोटा सा अंतर यह था कि लक्ष्या ने डिसाइड किया कि वो अपनी फीलिंग्स को शेयर करेगी हमारे साथ कि उसका यह समय किस तरह गुजरा।
लक्ष्या के केस में, उसकी कुछ प्लानिंग थीं लेकिन रियलिटी बहुत अलग थी। हां, स्ट्रेस और एंग्जाइटी लगातार बढ़ रही थी। बहुत सारे काम हैं जो अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। यहाँ कुछ चीजें हैं जो इस फेज़ से बाहर आने के लिए वह कर सकती है :

 

  • टाइम मैनेजमेंट : यह एक बहुत ही क्लिच टिप लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में तब काम करता है जब आप अपनी डेली लाइफ में टाइम मैनेजमेंट स्ट्रेटजी को इफेक्टिव ढंग से फॉलो करते हैं। हमने पहले इस बारे में बात की थी कि कैसे एक टीनएजर अपनी पढ़ाई और फिजिकल हेल्थ दोनों को महत्व दे सकता है। इसके बारे में पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं -

https://www.teentalkindia.com/got-a-question/Academic-Pressure/how-can-we-give-equal-importance-to

  • प्लान बनाइए और उन सब्जेक्ट्स को प्रायोरिटीज दीजिए, जिन्हें आपको हर दिन पढ़ने की ज़रूरत है।
  • अपनी क्षमता को ध्यान में रखते हुए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गोल्स बनाइए।
  • इस अवधि के दौरान खुद को शांत और खुश रखने की योजना बनाने के बजाय, स्कूलों के फिर से खुलने के बाद आप क्या करेंगे, इसके बारे में ज्यादा योजना न बनाएं।
  • स्कूल दोबारा खुलने के बाद आप क्या करेंगे इसके बारे में ज्यादा प्लान करने के बजाय, खुद को खुश और शांत रखने का प्लान बनाएं।
  • कोशिश करें स्मार्टफोन या सोशल मीडिया एडिक्टेड न हों ।
  • पढ़ाई के बीच में हमेशा खुद को थोड़े-थोड़े समय के बाद ब्रेक दीजिए और रिलैक्स कीजिए। इससे ब्रेन को कॉन्सन्ट्रेट करने में मदद मिलेगी।

यदि आप एंग्जाइटी और स्ट्रेस से भर चुके हैं, तो आपको अपनी फीलिंग्स अपने करीबी लोगों से शेयर करने की ज़रूरत है।
अगर आपको अभी भी लगता है कि आप इस सिचुएशन से निपटने में सक्षम नहीं हैं, तो प्लीज प्रोफेशनल से मदद लीजिए।

यदि आपके पास भी हमसे शेयर करने के लिए कोई कहानी है तो हमें यहां , ईमेल करें

यदि आपके पास कोई सवाल हैं, तो हमें यहां , ईमेल करें

आप क्लिक करके काउंसलर से भी बात कर सकते हैं टीनटॉक एक्सपर्ट चैट.

Comments

अगली कहानी


आपको क्यों परीक्षा को लेकर तनाव नहीं लेना चाहिए

तनाव ऐसा नहीं है कि आप उसे अपने जीवन पर नियंत्रण करने दें। यह न केवल आत्मविश्वास बल्कि हमारे प्रदर्शन को भी प्रभावित करता है
Gousiya Teentalkindia Content Writer

तनाव और चिंता ऐसी चीज़ है, जिसका सामना हम अपनी रोज़ाना की दिनचर्या में करते हैं। हालांकि परीक्षा के समय यह तनाव और बढ़ जाता है। हर बीतते दिन के साथ तनाव का स्तर आसमान छूने लगता है। ऐसे में हमें अहसास होता है कि अब हमारे पास पढ़ने के लिए और भी कम समय है।

जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता के डॉ. शुभ्रांगसु आदित्य कहते हैं कि किसी भी परीक्षा या जीवन में किसी भी अन्य संकट के समय होने वाला तनाव नकारात्मक नतीजों के अंदेशे से उत्पन्न होता है। सकारात्मक सोच ही चिंता और तनाव से निपटने की चाबी है। 

यहां हम आत्म-मूल्यांकन के परीक्षण के लिए एक एंग्ज़ाइटी टेस्ट दे रहे हैं, इसमें आप अपने स्ट्रेस लेवल का मूल्यांकन स्वयं कर सकते हैं। इस टेस्ट को 1990 में पी. निलेस्ट और एम. डिएल ने छात्रों में तनाव के गम्भीर और सामान्य स्तर को पहचानने के उद्देश्य से तैयार किया था।

अपने तनाव का परीक्षण :

ख़ाली स्थान में कभी नहीं के स्थान पर (1), कभी-कभी के स्थान पर (2), कई बार के स्थान पर (3), अक्सर के स्थान पर (4), या हमेशा के स्थान पर (5) अंक को भरिए :

1 मुझे परीक्षा के ठीक पहले पसीने से हथेलियों के गीले होने, हाथ कंपकंपाने जैसे घबराहट के लक्षण महसूस होते हैं …………….

2 परीक्षा के पहले पेट में मरोड़ें उठती हैं …………….

3 परीक्षा से पहले मितली आने लगती है ………….

4  मैं परीक्षा के लिए जब पढ़ता हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि मुझे कोई भी उत्तर याद नहीं है ………….

5  परीक्षा के पहले और परीक्षा देते समय मुझे घबराहट महसूस होने लगती है ……………

6  परीक्षा के दौरान मेरा दिमाग़ पूरा ख़ाली हो जाता है…………

7  मैं जैसे ही परीक्षा देकर बाहर निकलता हूं, मुझे वो सारी बातें याद आ जाती है, जिन्हें मैं भूल गया था …………

8  परीक्षा के एक रात पहले मुझे सोने में परेशानी होती है……..

9  मैं आसान सवालों को हल करने में ग़लती करता हूं या ग़लत जगह पर जवाब लिख देता हूं………

10  मुझे जवाब चुनने में कठिनाई महसूस होती है….

स्कोरिंग : अगर आपने दिए गए निर्देशों के अनुसार क्रमांक दिए हैं तो अब इन्हें जोड़ लीजिए। अंकों का जो जोड़ आया है, उसके आधार पर आप अपने चिंता या तनाव के स्तर को महसूस कर सकते हैं और उस पर काम कर सकते हैं।

10-19 – आप परीक्षा की चिंता से ग्रस्त नहीं हैं।

यदि आपके पास भी हमसे शेयर करने के लिए कोई कहानी है तो हमें यहां , ईमेल करें

यदि आपके पास कोई सवाल हैं, तो हमें यहां , ईमेल करें.

आप क्लिक करके काउंसलर से भी बात कर सकते हैं टीनटॉक एक्सपर्ट चैट.

टिप्पणियाँ

कॉपीराइट टीनटॉक 2018-2019
डिस्क्लेमर : टीनटॉकइंडिया आपातकालीन सेवाएं नहीं प्रदान करता है और न ही यह किसी तरह की आपदा में हस्तक्षेप करने वाला कोई केंद्र है। अगर आप या आपका कोई मित्र या परिचित गहरे अवसाद के दौर से गुज़र रहा है, या उसके मन में आत्महत्या या स्वयं को नुक़सान पहुंचाने वाले विचार आ रहे हैं तो कृपया निकटस्थ अस्पताल या आपातकालीन/आपदा प्रबंधन सेवा केंद्र या हेल्पलाइन से सम्पर्क करें।