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12वी आईसीएसई की कैसे करें तैयारी

एग्ज़ाम्स अब क़रीब हैं। ऐसे में यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप 12वी की परीक्षा पूरे आत्मविश्वास के साथ दे सकेंगे और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

यदि आप पिछले सालों के टॉपर्स से पूछेंगे तो वो आपको एग्ज़ाम्स में अच्छा स्कोर करने के अलग-अलग जवाब देंगे। लेकिन आप पाएंगे कि उनके पास कोई न कोई एक स्ट्रेटजी ज़रूर थी। इसलिए यदि आपके पास कोई प्लान नहीं है, तो ये आर्टिकल आपके काम का साबित होगा।

अपनी टास्क को जानें : एग्ज़ाम्स के सिलेबस को समझें। उसके बाद उसके सबसे ज़रूरी हिस्से को पहचानें। हर विषय में अपनी ताक़त और कमजोरी को जानें।

प्लान : आपकी स्टडी का प्लान और समय तय करें। नियमित और साप्ताहिक टाइम टेबल बनाएं। यदि आप एक घंटे हिस्ट्री या कोई लैंग्वेज पढ़ते हैं, तो स्विच करके मैथ्स, ग्रामर की कुछ प्रैक्टिकल स्टडी करें और डायग्राम बनाएं। इससे आपका ब्रेन अधिक फ़ोकस्ड और एकाग्र रहेगा। वह समझ सकेगा कि आपका कितना सिलेबस पूरा हो गया है और कितना रिवाइज़ करने की ज़रूरत है।

स्टडी स्मार्ट : निमोनिक्स, फ़्लैश कार्ड, माइंड मैप, रिविज़न चार्ट, फ्लो चार्ट बनाकर स्टडी मटेरियल को लम्बे समय तक याद रखने में मदद मिलेगी।  

प्लान + प्रैक्टिस :  यह ख़ासतौर पर प्रैक्टिकल एग्ज़ाम्स के लिए है। प्रैक्टिकल  अनदेखा न करें। यह ओवरऑल स्कोर बढ़ाने में मदद करता है।

लिखना : अधिक से अधिक बार लिखकर देखें। पिछले कुछ सालों के आईसीएसई के पेपर को अलार्म घड़ी सेट करके हल करकर देखें।

खु़द को रीफ्रेश करने के लिए समय निकालें : कुछ समय अपनी हॉबी और फ़िज़िकल गेम्स खेलने के लिए समय निकालें, इससे दिमाग़ और शरीर दोनों ही हेल्दी और फोकस्ड रहेंगे। पढ़ाई के बीच में ब्रेक लेना बेहद जरूरी है।

सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी से दूरी बनाएं : अपने मोबाइल / टैब  / कम्प्यूटर पर वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, गेम, फे़सबुक, ट्वीटर आदि न चलाएं। इससे आप किसी भी तरह के अतिरिक्त तनाव से बचेंगे।

हेल्दी बैलेंस्ड डाइट लें : जंक फ़ूड, फास्ट फ़ूड, ऑईली और रेडी टु ईट फ़ूड खाना बंद कर दें और हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट प्लान अपनाएं। घर का सादा खाना खाने से आपकी याददाश्त दुरुस्त होगी और एग्ज़ाम्स में बेहतर परफ़ॉर्म करने में मदद करेगी।
 

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अलग-अलग एजुकेशन बोर्ड

किस बोर्ड से स्टडी करनी है, यह आपके लॉन्ग टर्म प्लान, लक्ष्य, आर्थिक स्थिति और अन्य फै़क्टर्स पर निर्भर करता है। हर बोर्ड क्वालिटी एजुकेशन देता है और सही विकल्प चुनना स्टूडेंट के फै़सले पर निर्भर करता है।
Gousiya Teentalkindia Content Writer


देश में तीन सबसे जाने-पहचाने एजुकेशन बोर्ड हैं- स्टेट बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई। हर बोर्ड की अपनी खू़बी है तो कमियां भी हैं, जो स्टूडेंट की स्ट्रेन्थ, वीकनेस और प्लान्स पर निर्भर है। किसी बच्चे के लिए जो खू़बी हो, वही किसी और बच्चे के लिए ख़ामी हो सकती है।

बोर्ड का चयन करने में यहां दिए कुछ प्वाइंट्स मददगार होंगे। आईसीएसई बोर्ड में सिलेबस ज़्यादा विस्तार से और कॉम्पीटिटिव होता है। सीबीएसई बोर्ड में थोड़ा कम विस्तार से और कॉम्पीटिटिव होता है, जबकि सबसे कम स्टेट बोर्ड में होता है।

सीबीएसई बोर्ड :

बोर्ड दो परीक्षाएं आयोजित करता है- पहली ऑल इंडिया सेकंडरी स्कूल एग्ज़ामिनेशन एआईएसएसई (क्लास X) और ऑल इंडिया सीनियर स्कूल सर्टिफिकेट एग्ज़ामिनेशन  एआईएसएससीई ( XII)।

  • यदि ट्रांसफ़रेबल जॉब है तो यह बोर्ड आपके बच्चों के लिए सबसे बेहतर है क्योंकि सीबीएसई स्कूल देश के लगभग सभी शहरों में हैं।
  • सीबीएसई बोर्ड ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों मीडियम से क्लास में पढ़ाई को मान्यता दी है।
  • यह बोर्ड गणित और विज्ञान जैसे विषयों पर ज़ोर देने के लिए प्रसिद्ध है। 
  • सीबीएसई पूरी तरह से भारत सरकार से सम्बद्ध है और देशभर के सभी केन्द्रीय विद्यालयों को मान्यता देता है। 
  • पूरा सिलेबस एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) से मान्यता प्राप्त है। 
  • इस बोर्ड का एक अन्य फ़ायदा यह है कि ज़्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जेईई मैन्स (जिसे पहले एआईईईई के रूप में आयोजित किया जाता था) और एडवांस्ड, नीट (नेशनल एलिजिब्लिटी एंड एंट्रेंस टेस्ट) जो पहले एआईपीएमटी (ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट) के रूप में आयोजित होता था, इन सभी में इसका सिलेबस पूछा जाता है। 
  • सीबीएसई सिलेबस ज़्यादा थ्योरिटिकल होता है और यह स्टूडेंट्स पर प्रैक्टिकल नॉलेज के लिए कम ज़ोर डालता है। पूरा सिलेबस एप्लिकेशन ओरिएंटेड है। वास्तविक जीवन के कॉन्सेप्ट पर आधारित नहीं होने से यह प्रभावी समझ भी नहीं देता है। 
  • यह शिक्षा महंगी होने के साथ ही अधिक प्रतिस्पर्धी है।

आईसीएसई बोर्ड : सीआईएससीई, काउंसिल फ़ॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफ़िकेट एग्ज़ामिनेशन।

  • आईसीएसई बोर्ड का सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ इसका सिलेबस है। यह सिलेबस अधिक विस्तृत है और इसका स्ट्रक्चर ऐसा है कि यह स्टूडेंट्स को अधिक प्रैक्टिकल नॉलेज देने और उनमें विश्लेषण करने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है। 
  • आईसीएसई बोर्ड में क्लास में पढ़ाई अंग्रेज़ी मीडियम में होती है और अंग्रेज़ी विषय पर अधिक ज़ोर दिया जाता है। 
  • जो स्टूडेंट्स ह्यूमैनिटी और मैनेजमेंट के क्षेत्र में रुचि रखते हैं, उनके लिए इसका पाठ्यक्रम बेहतर है। इसमें कई भाषाएं पढ़ने के लिए हैं जैसे हिंदी, अंग्रेज़ी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु और अन्य। आईसीएसई में कई क्रिएटिव विषय जैसे फै़शन डिज़ाइन, एग्रीकल्चर, होम साइंस और कुकरी आदि इनोवटिव स्टूडेंट्स के लिए है। 
  • सख़्त और कठोर आंतरिक मूल्यांकन के कारण आईसीएसई परीक्षा पास करना अत्यधिक कठिन और प्रतिस्पर्धी है 
  • आईसीएसई बोर्ड का सिलेबस और पढ़ाई स्टूडेंट्स को कॉर्पोरेट वर्ल्ड के हिसाब से बिल्कुल फ़िट बनाते हैं। जो मैनेजमेंट स्टडीज़ को चुनते हैं, वे भविष्य में अच्छी लीडरशिप क्वालिटी के साथ अच्छे मैनेजर बनते हैं। 
  • सीआईएससीई सिलेबस को कई विदेशी एजुकेशन अकेडमी द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसलिए, यदि पैरेंट्स के रूप में आप काम के लिए विभिन्न देशों में जाते हैं, तो आईसीएसई बोर्ड आपके बच्चे के लिए आदर्श हो सकता है। 
  • आईसीएसई सिलेबस वर्ल्ड एजुकेशन स्टैंडर्ड के हिसाब से होने वाली स्कॉलरशिप परीक्षाओं के लिए सबसे सही विकल्प है। 
  • शिक्षा आर्थिक रूप से महंगी और अधिक प्रतिस्पर्धी है। 
  • यह बात दिमाग़ में रखिए कि आईसीएसई बोर्ड एक गै़र-सरकारी एजुकेशन बोर्ड है और 10वी क्लास के बाद आईसीएसई आईएससी (इंडियन स्कूल सर्टिफ़िकेट) में बदल जाता है।

 स्टेट बोर्ड : 

  • हर राज्य का अपना एजुकेशनल बोर्ड होता है और जिसका सिलेबस स्टेट एजुकेशन बॉडी तय करती है।
  • अगर आप स्टेट बोर्ड के स्कूल में स्टडी को चुनते हैं तो आपको राज्य की भाषा को अनिवार्य रूप से पढ़ना होता है।
  • इस बोर्ड को चुनने का सबसे बड़ा फ़ायदा इसकी कम फ़ीस होना है, जिससे कमज़ोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग अपने बच्चों को इसमें पढ़ा लेते हैं।
  • स्टेट बोर्ड में पढ़ाई करना कम तनावपूर्ण होता है। पढ़ाई का सिलेबस आसान है और यह स्टूडेंट्स को पढ़ाई से हटकर अन्य एक्टिविटीज़ जैसे खेल आदि पर फ़ोकस करने की छूट देता है।
  • जिन पैरेंट्स की ट्रांसफ़रेबल जॉब है, यह उनके बच्चों के लिए सही नहीं है।
  • छोटे शहरों और गांव में स्थित राज्य के स्कूलों में पर्याप्त सुविधाओं की कमी हो सकती है। 
  • यदि किसी को न्यूरोलॉजिकल समस्या जैसे लर्निंग डिसेब्लिटी या ऑटिज़्म या शारीरिक समस्या जैसे सुनने या बोलने या देखने में दिक़्क़त होती है, तो ऐसी स्थिति में उसे स्टेट बोर्ड में पढ़ने की सलाह दी जाती है।
  • किसी भी खेल में ज़िला स्तर, राज्य स्तर या राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने की चाह हो तो स्टेट बोर्ड के स्कूल में पढ़ने की सलाह दी जाती है।

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