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पांच ऐसे मौक़े, जब ज़िंदगी के हालात का सामना करने में मैथ्स की दाल नहीं गलती

इट्स ओके, अगर आपका मैथ्स अच्छा नहीं है

मैथ्स नम्बरों का खेल है। हम अपने रोज़ाना के जीवन में जोड़-घटाव का उपयोग करते हैं। किराने का सामान ख़रीदने से लेकर पकाने की रेसिपी या जनसंख्या वृद्धि को समझने और फाइनेंशियल प्लान बनाने तक में मैथ्स ही हमारे काम आता है। लेकिन अगर आप नम्बरों के विज्ञान के बजाय ब्रश के स्ट्रोक की ओर झुकाव रखते हैं, तो आप सवाल करेंगे कि क्या केलकुलस और ट्रिग्नोमेट्री कभी जीवन के रहस्य को सुलझाने में मदद करेंगे?

फिर भी, मान लें कि भले आप गणित में महारथी हों,  जीवन में कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जहां ट्रिग्नोमेट्री और अलजेब्रा काम नहीं आते। कौन-सी परिस्थितियां? आइए, इसकी जांच करते हैं :

1. प्यार में पड़ना : किसी के प्यार में पड़ने का कोई फ़ॉर्मूला नहीं है। यह पेट में उठने वाली ऐसी मरोड़ होगी, जो आपके घुटनों को कमज़ोर कर देगी। जब आप अपने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के टेक्स्ट मैसेज को अपने फ़ोन पर देखते हैँ, तो यह उत्साह होता है। यह गले लगने की गरमाहट है। यह आपके चेहरे की मुस्कराहट है।

2. "शेक्सपीयर को पढ़ना : ये दुनिया एक रंगमंच है, और यहां सभी केवल पात्र हैं। वो आते हैं और जाते हैं, एक व्यक्ति अपने जीवन में कई किरदार निभाता है।" यहाँ पर अक्षर ए किसी भी बिंदु पर बी के लिए रुकावट बन सकता है, वे कोई प्लान फ़ॉलो नहीं करते। आर्ट कभी प्लान से नहीं चलता है।

3. दोस्त बनाना : हम किसी भी व्यक्ति से बात करते समय उस इंसान की नाक या कान या हाथ या पैर की लम्बाई-चौड़ाई नहीं नापते हैं। हम उस इंसान की आवाज़ की टोन को कैलक्युलेट भी नहीं करते हैं या उसकी पर्सनैलिटी को 90 डिग्री के ट्राइएंगल पर फ़िट करने की कोशिश नहीं करते हैं। हम सिर्फ़ दोस्त बनाते हैं, और उनमें से कुछ जीवन भर साथ निभाते हैं।

4. आलू का परांठा खाना :  आलू का परांठा बनाने की प्रक्रिया में भले सभी सामग्रियों को सावधानीपूर्वक और सही अनुपात में मिलाने की ज़रूरत होती हो, लेकिन उसे खाने के लिए ऐसी किसी गणना की आवश्यकता नहीं होती है।

5. टूटे दिल का जुड़ना : क्या आप गिनकर बता सकते हैं कि आपका अगला ब्रेकअप कितने समय के बाद होगा? वास्तव में नहीं। क्या आप कैल्क्युलेट कर सकते हैं कि एक टूटा हुआ दिल पूरी तरह से ठीक कब होगा? कभी नहीं। हम सभी जानते हैं कि इसमें समय लगता है लेकिन कितना, ये कोई नहीं जानता है।

इसलिए, यह साबित हो चुका है कि फ़ॉर्मूला और थ्योरिम्स का भावनाओं और इमोशन के खेल में कोई हिस्सा नहीं है।

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पांच ऐसी एक्टिविटी, जो एग्ज़ाम के समय में आपको तरोताज़ा रखेंगी

इन एक्टिविटी के साथ परीक्षा के तनाव को रखें दूर और मन को रखें शांत
Snigdha Teentalkindia Counsellor

ऑल वर्क एंड नो प्ले मेक्स जैक अ डल बॉय- इस कहावत का आशय यह है कि यदि व्यक्ति बिना ब्रेक के सिर्फ़ काम करता रहे तो वो एक उदास और बोरिंग इंसान बन जाता है। यह कहावत परीक्षा के समय में आपके पूरे जीवन को दिखाती है। इसलिए युवाओं को उदासी को ख़ुद से दूर रखने का हरसम्भव प्रयास करने चाहिए।

आपको यह समझना चाहिए कि कोई भी क्लासेस, टेस्ट, एग्ज़ाम आपको हताश नहीं कर सकते हैं। एग्ज़ाम के समय में मेहनत से नहीं बचा जा सकता, लेकिन कुछ ब्रेक व्यस्त शेड्यूल में लेना भी फ़ायदेमंद हैं।

ये पांच एक्टिविटी एग्ज़ाम के दौरान कड़ी मेहनत करने और फ़ोकस करने में आपके लिए मददगार साबित होंगी।

(ख़ास बात यह है कि इन एक्टिविटी को आप आसानी से अपने स्टडी शेड्यूल में शामिल कर सकते हैं।)

साइक्लिंग :

बस से जाना या ख़ुद गाड़ी चलाकर जल्दी पहुंचना सुविधाजनक लगता है, लेकिन आप साइकल से स्कूल या क्लास जाएं। साइकिल चलाने में भले समय लगेगा लेकिन यह आपको ऊर्जा देगा और ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा। शारीरिक गतिविधियों के फ़ायदों पर कई अध्ययन हो ही चुके हैं, उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं है।

किसी पौधे की देखभाल करना :

अगर आप धरती को हरा-भरा रखना चाहते हैं, तो आप किसी पौधे की देखभाल केवल इसलिए भी कर सकते हैं। अगर नहीं तो यह अपने लिए करें। जब हम ख़ुद को रीफ्रेश करने वाली किसी एक्टिविटी की बात करते हैं तो उसमें पौधों की देखभाल महत्वपूर्ण है। इससे कई लाभ होते हैं। पहला तो यह आपको प्रकृति और ज़मीन से जोड़े रखता है, दूसरा यह आपको किताबों से बाहर झांकने देता है। एक पौधे से हम धैर्य से काम लेना और दृढ़ता भी सीखते हैं।

खाते समय संगीत सुनना :

संगीत लोगों पर थैरेपी की तरह काम करता है। संगीत तनाव के स्तर को शांत करने में मदद कर सकता है। कहते हैं कि यह ध्यान को लम्बे समय तक केंद्रित करने और याददाश्त बढ़ाने में मददगारहै और सबसे ज़रूरी बात यह कि यह सकारात्मकता को बढ़ाता है। इसलिए अगली बार जब पढ़ाई से ब्रेक लेकर लंच या डिनर करने बैठें तो अपने पसंदीदा संगीत को ट्यून करना न भूलें।

दोस्त को फ़ोन करना :

जब आप किसी से बात किए बिना घंटों लगातार पढ़ाई करते हैं, तो आप ज़ॉम्बी मोड में चले जाते हैं यानी वैसे ही जैसे नींद से उठने के तुरंत बाद की स्थिति होती है। ऐसे में आसान काम भी करते नहीं बनते हैं और व्यक्ति सुस्त हो जाता है। तब किसी दोस्त से कुछ मिनट फ़ोन पर बात करने से न केवल आपके तनाव के स्तर में कमी आती है बल्कि आप प्रेरित भी होते हैं। किसी दोस्त से स्टडी शेड्यूल साझा करने से न केवल आप अपडेट रहेंगे बल्कि अपनी पर्सनल टाइम डेडलाइन को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

कोई खेल खेलने या जॉगिंग के लिए वक़्त निकालें :

यह आपको समय की बर्बादी लग सकता है लेकिन पढ़ाई के समय में से 15 मिनट बचाकर आपको कितने फ़ायदे हो सकते हैं, इसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। अपने शरीर को ज़ंग लगने से बचाने और सुस्ती से बचने के लिए आपको किसी फ़िज़िकल एक्टिविटी की ज़रूरत होती है। वॉक या जॉगिंग एनर्जी लेवल को बढ़ाते हैं, जिससे पढ़ाई में मन लगता है।

हमारी इन-हाउस साइकोलॉजिस्ट शीना कालिया ख़ुद को तरोताज़ा करने वाली इन एक्टिविटी को ब्रेन सेल बूस्टर के रूप में देखती हैं। वे कहती हैं कि यदि आप बिना रुके लगातार पढ़ते रहते हैं तो कुछ समय बाद दिमाग़ भी जाम हो जाता है। ऐसे में नतीजे भी उतने अच्छे नहीं मिलते हैं। तब इस तरह के ब्रेक दिमाग़ को रीबूट करके एकाग्रता बढ़ाते हैं और परीक्षा में लिखने के लिए ज़रूरी विचारों को इकट्ठा करने और किताबें पढ़ने के लिए रीफ्रेश करते हैं।

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