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पांच ऐसी एक्टिविटी, जो एग्ज़ाम के समय में आपको तरोताज़ा रखेंगी

इन एक्टिविटी के साथ परीक्षा के तनाव को रखें दूर और मन को रखें शांत

ऑल वर्क एंड नो प्ले मेक्स जैक अ डल बॉय- इस कहावत का आशय यह है कि यदि व्यक्ति बिना ब्रेक के सिर्फ़ काम करता रहे तो वो एक उदास और बोरिंग इंसान बन जाता है। यह कहावत परीक्षा के समय में आपके पूरे जीवन को दिखाती है। इसलिए युवाओं को उदासी को ख़ुद से दूर रखने का हरसम्भव प्रयास करने चाहिए।

आपको यह समझना चाहिए कि कोई भी क्लासेस, टेस्ट, एग्ज़ाम आपको हताश नहीं कर सकते हैं। एग्ज़ाम के समय में मेहनत से नहीं बचा जा सकता, लेकिन कुछ ब्रेक व्यस्त शेड्यूल में लेना भी फ़ायदेमंद हैं।

ये पांच एक्टिविटी एग्ज़ाम के दौरान कड़ी मेहनत करने और फ़ोकस करने में आपके लिए मददगार साबित होंगी।

(ख़ास बात यह है कि इन एक्टिविटी को आप आसानी से अपने स्टडी शेड्यूल में शामिल कर सकते हैं।)

साइक्लिंग :

बस से जाना या ख़ुद गाड़ी चलाकर जल्दी पहुंचना सुविधाजनक लगता है, लेकिन आप साइकल से स्कूल या क्लास जाएं। साइकिल चलाने में भले समय लगेगा लेकिन यह आपको ऊर्जा देगा और ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा। शारीरिक गतिविधियों के फ़ायदों पर कई अध्ययन हो ही चुके हैं, उन्हें बताने की आवश्यकता नहीं है।

किसी पौधे की देखभाल करना :

अगर आप धरती को हरा-भरा रखना चाहते हैं, तो आप किसी पौधे की देखभाल केवल इसलिए भी कर सकते हैं। अगर नहीं तो यह अपने लिए करें। जब हम ख़ुद को रीफ्रेश करने वाली किसी एक्टिविटी की बात करते हैं तो उसमें पौधों की देखभाल महत्वपूर्ण है। इससे कई लाभ होते हैं। पहला तो यह आपको प्रकृति और ज़मीन से जोड़े रखता है, दूसरा यह आपको किताबों से बाहर झांकने देता है। एक पौधे से हम धैर्य से काम लेना और दृढ़ता भी सीखते हैं।

खाते समय संगीत सुनना :

संगीत लोगों पर थैरेपी की तरह काम करता है। संगीत तनाव के स्तर को शांत करने में मदद कर सकता है। कहते हैं कि यह ध्यान को लम्बे समय तक केंद्रित करने और याददाश्त बढ़ाने में मददगारहै और सबसे ज़रूरी बात यह कि यह सकारात्मकता को बढ़ाता है। इसलिए अगली बार जब पढ़ाई से ब्रेक लेकर लंच या डिनर करने बैठें तो अपने पसंदीदा संगीत को ट्यून करना न भूलें।

दोस्त को फ़ोन करना :

जब आप किसी से बात किए बिना घंटों लगातार पढ़ाई करते हैं, तो आप ज़ॉम्बी मोड में चले जाते हैं यानी वैसे ही जैसे नींद से उठने के तुरंत बाद की स्थिति होती है। ऐसे में आसान काम भी करते नहीं बनते हैं और व्यक्ति सुस्त हो जाता है। तब किसी दोस्त से कुछ मिनट फ़ोन पर बात करने से न केवल आपके तनाव के स्तर में कमी आती है बल्कि आप प्रेरित भी होते हैं। किसी दोस्त से स्टडी शेड्यूल साझा करने से न केवल आप अपडेट रहेंगे बल्कि अपनी पर्सनल टाइम डेडलाइन को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

कोई खेल खेलने या जॉगिंग के लिए वक़्त निकालें :

यह आपको समय की बर्बादी लग सकता है लेकिन पढ़ाई के समय में से 15 मिनट बचाकर आपको कितने फ़ायदे हो सकते हैं, इसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। अपने शरीर को ज़ंग लगने से बचाने और सुस्ती से बचने के लिए आपको किसी फ़िज़िकल एक्टिविटी की ज़रूरत होती है। वॉक या जॉगिंग एनर्जी लेवल को बढ़ाते हैं, जिससे पढ़ाई में मन लगता है।

हमारी इन-हाउस साइकोलॉजिस्ट शीना कालिया ख़ुद को तरोताज़ा करने वाली इन एक्टिविटी को ब्रेन सेल बूस्टर के रूप में देखती हैं। वे कहती हैं कि यदि आप बिना रुके लगातार पढ़ते रहते हैं तो कुछ समय बाद दिमाग़ भी जाम हो जाता है। ऐसे में नतीजे भी उतने अच्छे नहीं मिलते हैं। तब इस तरह के ब्रेक दिमाग़ को रीबूट करके एकाग्रता बढ़ाते हैं और परीक्षा में लिखने के लिए ज़रूरी विचारों को इकट्ठा करने और किताबें पढ़ने के लिए रीफ्रेश करते हैं।

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स्कूल पॉलिटिक्स को समझना और आगे बढ़ना

स्कूल पॉलिटिक्स कहीं आपकी पढ़ाई पर असर तो नहीं डाल रही? इस स्टोरी में एक टीनएजर अपने स्कूल के दिनों के अनुभवों को हमसे साझा कर रहा है कि कैसे माइंड गेम और पक्षपात को उसने डील किया।
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

हम जब भी राजनीति शब्द सुनते हैं, तो हमारे मन में क्या ख़याल आता है? भारतीय राजनीति? चुनाव? ट्रिक्स? क्रूरता? जी हां, हममें से ज़्यादातर के लिए राजनीति यही है। मेरे लिए भी पहले यही सब था, जब तक कि मैं स्कूल में जाना-पहचाना एक टीन नहीं बन गया। मैं आप टीनएजर्स को आज एक शब्द से परिचित कराता हूं, जिसे आप जानते भले न हों, लेकिन ख़ुद को उससे जुड़ा हुआ ज़रूर समझेंगे – स्कूल पॉलिटिक्स (TAADDAA)।

मैं कुछ ऐसी चीज़ों के साथ शुरू करना चाहता हूं, जो हम सभी ने देखी या नोटिस की हैं। आपके स्कूल में भी हर शिक्षक के पास एक स्टूडेंट या कुछ स्टूडेंट्स का एक ग्रुप होता है, जिसे वे पसंद करते हैं। और वे स्टूडेंट हर विषय में अच्छे ग्रेड्स भी हासिल करते हैं। लेकिन मेरे दोस्तों, यह स्कूल पॉलिटिक्स की पहली झलक है।  

योग्य थे पर चुने नहीं गए
अब मैं अपने अगले पॉइंट पर आता हूं, और वह है बायस्ड सिस्टम। कई बार आप स्कूल में ऐसा महसूस करते हैं कि आपको विश्वास होता है कि यह अवसर आपके लिए है, मगर आप उसे हासिल नहीं कर पाते हैं। यह सच भी है और सामान्य है और यह कभी न कभी सभी के साथ होता है। मैंने भी इसका सामना किया है। मेरा स्कूल दिल्ली में होने वाली नेशनल एमयूएन कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वाला था। सिलेक्शन के लिए एक मॉक एमयूएन ऑर्गेनाइज़ किया गया था। मैं उसमें सिलेक्ट हुए 6 बेस्ट डेलिगेट्स में से एक था। लेकिन क्या मैं दिल्ली में उसमें शामिल हुआ? दु:ख की बात है नहीं।

मुझे गहरी निराशा हुई। मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी, और स्कूल का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुझे चुना जाना चाहिए था। अफसोस की बात है कि शिक्षक के क़रीबी छात्रों को कॉन्फ्रेंस में शामिल होने का अवसर मिला। इस अनुभव के बाद, मैंने ख़ुद को कमतर महसूस नहीं होने दिया और यह कहकर अपने को समझाया कि यह बात घटना है। लेकिन स्कूल में होने वाली इस तरह की एक्टिविटी स्टूडेंट्स पर असर डालती हैं और इसमें टीचर्स तक शामिल होते हैं।

क्या यह परफ़ेक्ट है?
एक और पहलू जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है स्कूल प्रीफे़क्ट की नियुक्ति- हेड बॉय और हेड गर्ल। मैं नहीं समझ सकता कि कुछ को बहुत-से बच्चों से कैसे अलग किया जाता है। इन ख़ास बच्चों की मुख्य ज़िम्मेदारी अन्य स्टूडेंट्स की निगरानी करना होता है। अक्सर प्रीफे़क्ट बॉडी के पास कुछ ख़ास अधिकार होते हैं, जो दूसरे स्टूडेंट्स के पास नहीं होते। वे स्टूडेंट्स से अलग कलर की यूनिफ़ॉर्म पहनते हैं और स्टूडेंट्स को उनके बुरे बर्ताव के लिए या स्कूल के नियम तोड़ने के लिए सज़ा भी दे सकते हैं। ऐसे में ये बच्चे अपने दोस्तों का पक्ष लेते हुए अपनी ताक़त का दुरुपयोग करते हैं। इसकी वजह से छात्रों के बीच झगड़े, प्रतिद्वंद्विता और सस्पेंशन तक की स्थिति बन जाती है।

यह अच्छा है या बुरा?
स्कूल ने मुझमें कई अच्छे गुण पैदा किए और मुझे एक मज़बूत व्यक्ति बनाया। पर इसने मुझे पॉलिटिक्स को समझने का भी नज़रिया दिया। मैंने ऑब्ज़र्व किया है कि स्कूल पॉलिटिक्स और पक्षपत के कारण कुछ बच्चे मायूसी महसूस करते हैं और कुछ स्टूडेंट्स, जिनमें बेहतर करने की क्षमता होती है, वह भी पीछे रह जाते हैं।  

लेकिन दूसरी ओर इसका एक पहलू यह भी है कि यह अनुभव हमें वास्तविक दुनिया की राजनीति के लिए तैयार कर रहा है। इसलिए क्या हमें इस सिस्टम का हिस्सा बनना चाहिए या इससे दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए और या हमें इस सिस्टम को बदलने की कोशिश करनी चाहिए?

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