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सोचने के तरीक़ों में पांच बदलाव

भारत में जहां हमें संस्कृति और परम्परा की समृद्ध धरोहर मिली है, वहीं कई बार हम फ़िक्स्ड माइंडसेट या बनी-बनाई सोच की वजह से पीड़ित भी होते हैं। यहां हम पांच ऐसी सोच के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्हें अब वक़्त के साथ सुधारने की ज़रूरत है।

टीनएज से गुज़रना किसी युद्ध के मैदान में चलने से कम नहीं है। दोस्तों और टीनएज के दबाव के कारण हर क़दम पर कई तरह के ख़तरे मंडरा रहे होते हैं। टीनएज से जुड़े अधिकांश मुद्दे सिर्फ़ लकीर के फ़कीर वाली सोच के कारण सामान्य मुद्दों से हटकर अपराध की तरह नज़र आने लगते हैं।

ख़ासकर भारत जैसे देश में पुरुष प्रधान समाज के कारण कई चीज़ें आज भी एक ही तरह से तराज़ू में तौलकर देखी जाती हैं। कुछ मानसिकताएं तो हमारे समाज में और कभी-कभी हमारे घर-परिवार में भी इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी होती हैं कि वे हमारे भविष्य को भी ख़तरे में डाल देती हैं।

एक नज़र उन पांच बनी-बनाई सोच पर, जिन्हें अब भारत में डम्प करने की ज़रूरत है-

माइंडसेट : मार्क्स = इंटेलीजेंस :

हमारे देश में यह बंधी हुई सोच है कि अगर बच्चे के नम्बर अधिक आए हैं तो उसे उसके बुद्धिमान होने का सर्टिफ़िकेट मान लिया जाता है। वास्तविकता यह है कि वर्तमान भारतीय शिक्षा व्यवस्था रट-रटकर याद करने की तकनीक पर आधारित है।

एक स्टूडेंट की वास्तविक योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस तरह का बुद्धिमान है।

आप किस तरह के बुद्धिमान हैं, इसे समझने के लिए इस कहानी को पढ़िए -

https://www.teentalkindia.com/explore/academic-pressure/what-kind-of-intelligence-do-you-have-let-s-find-out

माइंडसेट : शर्मा जी का बेटा ही कॉम्पीटिशन है।

हमारे देश की एक अन्य बंधी हुई सोच यह है कि हम अपने टीनएजर बच्चों की तुलना बहुत बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसी शर्मा जी के बेटे से करते हैं। यह हम सभी के जीवन में होता है।

इस तय मानसिकता के बारे में अधिक जानना हो तो हमारी कहानी शर्मा जी का बेटा पढ़िए, इस लिंक पर -

https://www.teentalkindia.com/explore/body-image-selfesteem/decoding-the-deal-with-sharmaji-ka-beta

माइंडसेट : डॉक्टर और इंजीनियर ही विश्वसनीय कॅरियर के विकल्प हैं।

हमारी सोसायटी में डॉक्टर और इंजीनियर बनने वाले बच्चों को लेकर एक जुनून-सा है। अधिकांश भारतीय घरों में बच्चा क्या बनने वाला है, उससे ही उसकी योग्यता का आंकलन किया जाता है।

यदि किसी स्टूडेंट के पास कॅरियर को लेकर ऐसी एस्पिरेशंस हैं, जो पारम्परिक नहीं हैं, तो उसे हतोत्साहित किया जाता है, नाकारा समझा जाता है। इस मानसिकता को कुछ साल पहले आई चर्चित फ़िल्म 3 इडियट्स में खू़बसूरती से दिखाया गया है। 3 इडियट्स पर हमारी कहानी यहां पढ़िए-

माइंडसेट : हम तो ऐसे ही हैं, हम नहीं सुधरेंगे

हम भारतीयों की एक अन्य बंधी हुई मानसिकता यह है कि हम अपनी कई परम्पराओं में ऐसे जकड़े हुए हैं कि अपनी भलाई के लिए भी उन्हें बदलना नहीं चाहते हैं।

वक़्त के साथ नहीं बदलना और रूढ़िवादी दृष्टिकोण को ही जीवन में पकड़े रहना जनरेशन गैप को और अधिक बढ़ाता है और यह किसी के लिए अच्छा नहीं है। यह वह दौर है, जब हम अपनी सोच को विकसित भी कर सकते हैं और सीख भी सकते हैं कि कैसे समय के संग चलते हुए अपनी जड़ों से जुड़े रहें। सिर्फ़ माता-पिता की इच्छाएं पूरी करने के लिए कोई अपने मक़सद को हासिल नहीं कर सके, यह नहीं होना चाहिए। 

हमारी इनहाउस कांउसलर क्षितिजा सावंत के अनुसार, हमारी सोसायटी में मौजूद रस्मों-रिवाज़ों को लेकर लगातार सवाल पूछे जाएं और उनका मूल्यांकन किया जाए। हम सभी को यह याद रखने की जरूरत है कि बहुत-सी प्रथाएं ऐसी हैं, जो समाज में किसी के लिए फ़ायदेमंद नहीं हैं। इसलिए जो परम्पराएं आपकी राह में बाधा बन रही हैं, उन्हें बदलने की ज़रूरत है।

माइंडसेट : या तो हम इंटेलीजेंट पैदा होते हैं या एवरेज या फिर मूर्ख

एक अन्य तय मानसिकता वह है, जिसके चलते हम लोगों को टैग करना पसंद करते हैं कि वह इंटेलीजेंट है एवरेज है या फिर डम्ब है। और यह सिर्फ़ उस पढ़ाई के आधार पर तय किया जाता है, जो रटी-रटाई बातें दोहराने को महत्व देती है।
 
एक स्टूडेंट के पढ़ाई में प्रदर्शन को ही उसकी बुद्धिमानी का पैमाना मानना सही नहीं है। हम सभी अलग-अलग चीज़ों में बुद्धिमान नहीं हैं, मगर हम सभी किसी न किसी चीज़ में बेहतर कर सकते हैं।

बहुत सारे सामाजिक, भावनात्मक और मानसिक फ़ैक्टर हमारी बुद्धिमत्ता और प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए हमें लेबल्स को क्लीयर करना सीखना चाहिए। हमारी इन-हाउस काउंसलर, क्षितिजा सावंत के अनुसार, “विभिन्न प्रकार की बुद्धिमत्ता वाले लोगों के बीच तुलना करना ठीक नहीं है। कोई व्यक्ति पढ़ाई में अच्छा है, जबकि कोई दूसरा खेल में शानदार प्रदर्शन करता है, लेकिन पढ़ाई में औसत या कमज़ोर है। तब पढ़ाई में अच्छे व्यक्ति को स्मार्ट समझना ग़लत है। हर व्यक्ति की समाज में एक भूमिका होती है।

अगर आपकी कॅरियर सम्बंधी कोई जिज्ञासा हैं तो आप टीनटॉक से सम्पर्क कर सकते हैं। आप नीचे कोई कमेंट कर सकते हैं या फिर expert@teentalkindia.com पर काउंसलर से सम्पर्क कर सकते हैं।

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Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

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