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योगिनी नताशा : बाल शोषण से खुद को प्यार करने तक का सफर

नताशा पेशे से एक वेलनेस कोच हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 82 हजार से अधिक फॉलोवर हैं। उनका कहना है कि मैंने डिप्रेशन से लड़ने की लगातार कोशिश की और आज मैं बेहतर स्थिति में हूं।

आप सबसे बड़े रहस्य हैं। सबसे पहले अपने आप को समझें, महसूस करें और जानें आप कितनी शानदार शख्सियत हैं। यह कहना है योगिनी नताशा नोयल का। नताशा पेशे से एक वेलनेस कोच हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 82 हजार से अधिक फॉलोवर हैं। उनका कहना है कि मैंने डिप्रेशन से लड़ने की लगातार कोशिश की और आज मैं बेहतर स्थिति में हूं।

नाताशा के अवसाद के बारे में बात करना या जानना इस बात का संकेत देता है कि परेशानियां जीवन का हिस्सा है। इससे ये भी मालूम होता है कि अवसाद या मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से एक बार पीड़ित होने के बाद यह जीवन में कभी भी लौट सकता है। हम इससे केवल बेहतर तरीके से लड़ना सीख सकते हैं।

नाताशा बताती हैं अवसाद से लड़ने से पहले खुद को जानना जरूरी है। यह आत्मनिरीक्षण करने सबसे ज्यादा मदद करते हैं। वह कहती हैं कि जब वो खुद अवसाद से जूझ रहीं थीं तो उन्होंने यही तरीका अपनाया था। अपनी बेचैनी का कारण ढूंढें। नताशा उस दौरान लगातार खुद से बात करती थीं और दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचारों से तर्क करती थीं। अपने डर का सामना करने की कोशिश करती थीं।

इसकी शुरूआत सुबह उठकर आइना देखने से होती है। आइना देखें और खुद से कहें 'मैं तुमसे प्यार करती हूं।' नताशा कहती हैं, "यहां जरूरी है कि आपको अपने दिमाग को यह विश्वास दिलाना होगा कि आप प्यार के योग्य हैं।" ये थोड़ा मुश्किल काम है।

नताशा का बचपन और टीनएज का दौर खुद के शरीर को सहज बनाने में बीता है। जब वो तीन साल की थीं तो उनकी मां ने खुद को आग लगा ली थी। वो अपनी मां की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानती थीं। 7 साल की उम्र में उन्हें शारीरिक शोषण का सामना करना पड़ा। उन्होंने शर्म और दर्द की वजह से खुद को दूसरों अलग कर लिया। वो खुद को बुरी लड़की समझने लगीं जो किसी से बात करने लायक भी नहीं है। वो भावनाओं के इस भंवर में फस गईं। ये अवसाद के सामान्य और शुरुआती लक्षण हैं। इससे बाहर आने में उनकी किसने मदद की? तो वो है डांस। डांस की वजह से नताशा अच्छा महसूस करती थीं। उन्हें संगीत और लय से खुद को संभालने में मदद मिलती थी। इससे प्रेरित होकर उसने योग करना शुरू किया।

नताशा ने यू-ट्यूब पर मौजूद योग वीडियोज देखने शुरू किए और इसके बाद द योगा इंस्टीट्यूट, सांता क्रूज़ ईस्ट (एक 3-महीने का कोर्स), अष्टांग विनासा, मैसूर (1 महीने) और मिस्टिक रोज़ मेडिटेशन, गोवा (21 दिन) के कई कोर्सेस किए। उसने योग नृत्य करना सीखा। इसके बाद वो सेमिनार और कार्यशालाओं में भाग लेने लगी। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया और कई प्लेटफॉर्म्स पर अपने वीडियोज शेयर किए। वह अपने फॉलोअर्स तक हमेशा प्यार और खुद को प्राथमिकता देने का संदेश देती हैं। वह कहती हैं-' आप खुद बहुत रहस्यमयी हैं। पहले खुद को पहचानों, खुद महसूस करो कि आप कितने शानदार हो।'

आज नताशा शहर की सबसे लोकप्रिय योगा टीचर हैं। केवल योग की वजह से नहीं बल्कि वो अपने संदेशों के कारण भी जानी जाती हैं। नताशा वर्तमान में सांता क्रूज़ (ईस्ट) और फ्यूचर स्कूल ऑफ़ परफॉर्मिंग आर्ट्स (कलिना) में द योग इंस्टीट्यूट में पढ़ाती हैं।

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खुद को पाने के लिए डांस करें

नताशा अग्रवाल बचपन में यौन शोषण का शिकार हुईं। उस वक्त उन्हें इस हादसे को लेकर चुप रहने के लिए कहा गया। उन्होंने खुद को खुश रखने के लिए डांस सीखा, इसके जरिए वो ये महसूस कर पाती थीं कि उनका शरीर कोई सैक्शुअल ऑब्जेक्ट नहीं है।
Nishtha JunejaTeentalkindia Content Writer

नताशा अग्रवाल थ्री लेफ्ट फीट नाम का एक संस्थान चलाती हैं जिसमें डांस मूवमेंट थेरेपी (DMT, डीएमटी) प्रोग्राम चलाती हैं।  इसके जरिए वो टीनएजर्स और अन्य लोगों को किसी भी तरह के सदमे से उबरने में मदद करती हैं।
नताशा अग्रवाल बचपन में यौन शोषण का शिकार हुईं। उस वक्त उन्हें इस हादसे को लेकर चुप रहने के लिए कहा गया। उनसे कहा गया कि इसे लेकर बात ना करें। एक नॉर्मल जिंदगी बिताने की कोशिश करें। लेकिन नताशा के लिए नॉर्मल रहना आसान नहीं था। उनके लिए ये ऐसा था, जैसे वो अपने शरीर के साथ गलत कर रही हैं। उन्हें लगने लगा कि उनका शरीर उनका नहीं है। लेकिन जब डांस करती थीं तो उन्हें अपने शरीर से और खुद प्यार होने लगता था। नताशा बताती हैं, 'खुद को खुद से जोड़ने के लिए मैं ज्यादा से ज्यादा वक्त डांस को देने लगी। डांस करना मेरे लिए एक थेरेपी की तरह हो गया।' नताशा ने डांस मूवमेंट थेरेपी  (DMT) की खोज की। उन्होंने खुद को खुश रखने के लिए डांस सीखा, इसके जरिए वो ये महसूस कर पाती थीं कि उनका शरीर कोई सैक्शुअल ऑब्जेक्ट नहीं है।


34 साल की नताशा के मुताबिक, 'इस थेरेपी के जरिए मेरे सामने दुनिया के दरवाजे खुल गए। मैं भावनात्मक रूप से काफी हल्का महसूस करने लगी। डांस की भाषा ने मुझे दोबारा सांस लेना सिखाया।' हमारा शरीर और दिमाग एक दूसरे से जुड़ा होता है और एक दूसरे के मुताबिक ही काम करते हैं। DMT इसी बेसिक प्रिंसिपल का इस्तेमाल करता है। इसके जरिए हमारा दिमाग और भी बेहतर तरीके से काम करने लगता है और एक खुशनुमा माहौल बना देता है।
आगे नताशा बताती हैं- DMT का मतलब म्यूजिक में अपने शरीर को उसके हिसाब से डांस करने देना। इसी में किसी भी तरह का परफेक्शन या किसी खास तरह के डांस फॉर्म में माहिर होने की आवश्यक्ता नहीं है और ना ही किसी भी तरह की डांस क्लास ज्वाइन करने की जरूरत है। बस म्यूजिक लगाइए और डांस करिए।
नताशा ने इसी के साथ थ्री फूट डांस क्लास नाम से अपने सेंटर की शुरुआत की। ये एक ऐसी जगह है जहां डांस को एक थेरेपी की तरह किया जाता है। इसके जरिए लोग खुद को रिलेक्स करते हैं और सुकून पाते हैं। क्लास की शुरुआत वॉर्म-अप सेशन से होती है, जिसमें उन्हें ये एहसास दिलाया जाता है कि वो ये बेहद आराम से कर सकते हैं। वहीं डांस करने का स्टाइल इस पर निर्भर करता है कि पार्टीसिपेंट्स डांस आखिर कर क्यों रहे हैं। जैसे वो 2 ग्रुप बनाती हैं जिसमें से एक ग्रुप में वो लोग होते हैं जो खुद से खुद को जोड़ना चाहते हैं। इस ग्रुप के लिए वो एक दुपट्टे का इस्तेमाल एक नदी की तरह करती हैं। जिसे पकड़ कर पूरे ग्रुप को इस तरह से डांस करना होता है जैसे वो इसके जरिए एक दूसरे से जुड़ रहे हैं। वहीं दूसरे ग्रुप में वो उन बच्चों को रखती हैं, जो यौन शोषण का शिकार हुए हैं। उन्हें इस दर्द से बाहर निकालने के लिए नताशा 'से नो' थेरेपी का इस्तेमाल करती हैं।
यहां जानिए कि ये कैसे काम करता है:
• कल्पना करें कि आपकी उंगलियां सभी दिशाओं में रंग उगल सकती हैं। अपनी उंगलियों की शक्ति का उपयोग करके, अपने चारों ओर एक रंगीन बुलबुला बनाएं।
• यह आपकी ढाल है, आपकी आभा (Aura) है।
• जब आप चारों ओर घूमते हैं और विभिन्न लोगों से मिलते हैं, तो आप पर निर्भर करता है कि आप उन्हें अपने संसार में आने की अनुमति दें या नहीं।  
• अगर आपको लगता है कि आप किसी से बात नहीं करना चाहते हैं, तो अपना हाथ बाहर निकालें, इसका मतलब है कि आपने उस शख्स को अपने संसार में आने की अनुमति नहीं दी है।
• यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि बुलबुला आपका सुरक्षित स्थान है और इस पर आपका नियंत्रण है।
नताशा कहती हैं- 'मैंने ना कहने की शक्ति का एहसास किया है और ये लाजवाब है। मैंने इसे कई बार आजमाया है और ये मुझे काफी पसंद है।' अब नताशा इसी तरह के सेशन का आयोजन सीनियर सिटीजन्स, दिव्यांग लोगों के लिए, सेक्स वर्कर्स के बच्चों के लिए और टीनएज बच्चों के लिए भी करने लगीं हैं। DMT के इस सफर के दौरान उन्होंने कई लोगों की मदद की है। इनमें से एक हैं किएशा, जो ऑल इंडिया रेडियो में काम करती हैं। किएशा बताती हैं- 'पहली बार मैं नताशा से उनके घर पर मिली। ये मुलाकात DMT सेशन को लेकर थी। मुझे उनके जोशीले स्वभाव ने काफी अच्छा महसूस कराया।'  

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